उदयपुर. दिगम्बर जैन दशा हुमड़ समाज संस्था की ओर से मंगलवार को आयोजित समारोह में तपस्वियों का सम्मान, कार्यकारिणी परिचय, सामूहिक क्षमा याचना एवं सांस्$कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन हुए। बतौर अतिथि भरत कुमार वखेरिया, कन्हैयालाल सगोटिया, पुष्पेंद्र जैन, राजेन्द्र पचौरी ने विचार व्यक्त किए। संस्था अध्यक्ष कमलकुमार जैन की उपस्थिति में बड़ी संख्या में समाजजनो ने कार्यक्रम में हिस्सेदारी निभाई।
प्रवचनों को करें आत्सात
आचार्य शिवमुनि के सानिध्य में महाप्रज्ञ विहार में मंगलवार को उपस्थित श्रावकों ने धर्मलाभ लेते हुए आत्म ध्यान किया। चातुर्मास संयोजक वीरेद्र डांगी ने बताया कि मुनि ने श्रावकों को विशेष आत्मध्यान कराते हुए दृष्टा भाव में रहने के लिए प्रेरित किया। मुनि ने कहा कि धर्मसभा में सुना है, देखा है उसे ध्यान की मुद्रा में आत्मसात करने का प्रयास करें। स्वयं में स्थिर होने की प्रेरणा देते हुए श्रावकों को बोध कराया कि आत्मा ही परमात्मा है। आत्मा तो हम सभी के भीतर विराजमान है। उसमें अनन्त सुख हैं, उसमें अनन्त शक्ति है। आत्मा ही हमें परमात्म तक ले जा सकती है। संघ अध्यक्ष औंकारलाल सिरोया ने बताया कि देशभर से बड़ीसंख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने इस मौके पर हिस्सा लिया। युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने भी विचार व्यक्त किए।
धन ने डाली दरारें
मुनि शास्त्र तिलक विजय ने कहा कि आज लोगों में धन का लोभ इतना बढ़ गया है कि भाई-भाई के सामने धन के लिए कोर्ट में जाता है। बाप और बेटे भी धन के लिए झगड़ते हैं। दरअसल सोचें तो धनवान हो या कम धन हो, सभी चार रोटी ही खाते हैं। धनवान हो या गरीब हो सब एक साथ एक ही कपड़े पहनते हैं। सबको सोने के लिए एक जैसा स्थान चाहिए। सभी को मरने के बाद लकड़ी से ही जलना है। इसके बाद धन के लिए क्यों मन और जिंदगी बिगाड़ते हो।
धार्मिक अनुष्ठान आज से
नवरात्रि के पावन अवसर पर हुमड़ भवन में बुधवार से नवरात्रि पर्यंत विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे। सकल दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत ने बताया कि नवरात्रि के पावन अवसर पर 108 सौधर्म इन्द्रों की ओर से चमत्कारिक सहस्रनाम विधान होगा। हर शाम ७ बजे से डांडिया और गरबा का आयोजन होगा। इधर, धर्मसभा को संबोधित करते हुए मंगलवार को सुमित्र सागर महाराज ने कहा कि जीवन में दु:खी होने का कारण दूसरों से अपेक्षाएं रखना है।
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ज्योषित का बताया विज्ञान
आयड़ तीर्थ पर आचार्य यशोभद्र सूरिश्वर की निश्रा में जारी ज्योतिष क्लास के दूसरे दिन मंगलवार को चित्रों के माध्यम से ज्योतिष विद्या सिखाई गई। आचार्य श्री ने कहा कि ज्योतिष ज्ञान ही नहीं विज्ञान है। इससे भविष्य में होने वाली दिशा सूचकों की ओर इशारा मिलता है। वहीं आपका समय किस तरह गुजरेगा यह भी हाथों की लकीरें बताती हैं। ज्योतिष के प्रति आश्वस्त होना चाहिए। ज्योतिष ज्ञान-विज्ञान है इसे समझने की आवश्यकता है।
अंदर की दौलत बढ़ाएं
जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के तत्वावधान में आराधना भवन में पन्यास प्रवर श्रुत तिलक विजय ने धर्मसभा में कहा कि सबसे अमीर कौन? इस प्रश्न का समाधान जीवन की दिशा तय करने के लिए जरूरी है। दौलत की तृष्णा एक आग जैसी है।
सम्पति सुपारी जैसी
आयड़ वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संस्थान के तत्वावधान में ऋषभ भवन में चातुर्मास कर रहे मुनि प्रेमचंद ने धर्मसभा में कहा कि भाग्यवान वह है जिसके पीछे धन दौड़ता है। अभागा वह है जो धन के पीछे दौड़ता है। सम्पति सुपारी जैसी है, सुपारी से दांत दु:खते है, परंतु पेट नहीं भरता। ठीक उसी प्रकार सम्पति पाने के कष्ट उठाने पड़ते हैं, किंतु शान्ति नसीब नहीं होती है।





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