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पोकरण में इस खतरनाक बीमारी के जांच की व्यवस्था है लेकिन उपचार की नहीं,मरीजों की यहां जाना मजबूरी

पोकरण. पोकरण स्थित राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में डेंगू के मरीजों की जांच की व्यवस्था है, लेकिन डेंगू पाए जाने पर उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में उन्हें जोधपुर रैफर करना पड़ता है तथा 200 किमी दूर जोधपुर जाने के बाद ही मरीज को उपचार मिल पाता है। गौरतलब है कि क्षेत्र में अच्छी बारिश के बाद जगह-जगह पानी एकत्र हो जाने, झाडिय़ां लग जाने व मौसम में नमी हो जाने के कारण बड़ी संख्या में पनपने वाले मच्छरों से मलेरिया व डेंगू जैसे रोग फैलते है। हालांकि चिकित्सकों का दावा है कि पोकरण क्षेत्र में बारिश नहीं होने, तालाब, खड़ीन व रिण क्षेत्रों में बारिश का पानी जमा नहीं होने के कारण मलेरिया व डेंगू के मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। स्थानीय राजकीय चिकित्सालय में डेंगू के संदिग्ध मरीज की जांच की व्यवस्था है, लेकिन रोगी की हालत गंभीर हो जाने पर उसे प्लेटलेट्स व रक्त चढ़ाने के साधन नहीं होने के कारण उन्हें जोधपुर रैफर करना पड़ता है। कई बार ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को यहां उपचार के अभाव में गंभीर अवस्था होने पर जोधपुर रैफर किया जाता है, लेकिन 200 किमी की दूरी होने के कारण जोधपुर पहुंचने में दो से तीन घंटे लग जाते है। ऐसे में कई बार मरीज के जीवन पर संकट आ जाता है।

मच्छरों से होता है डेंगू
राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सालय प्रभारी डॉ.बाबूलाल गर्ग के अनुसार मलेरिया व डेंगू जैसे बुखार एक विशेष प्रकार के मच्छरों से फैलते है। इस वर्ष क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण डेंगू व मलेरिया के रोगियों की संख्या नहीं है। यदि डेंगू से पीडि़त कोई व्यक्ति बाहर से आता है तथा उसके कपड़ों व बिस्तर में भी डेंगू का मच्छर आ जाता है। उससे अथवा पीडि़त मरीज को काटकर कोई मच्छर अन्य किसी व्यक्ति को काटता है, तो उसके संक्रमण से भी डेंगू होने की आशंका रहती है। उन्होंने बताया कि स्थानीय चिकित्सालय में सीबीसी जांच की पर्याप्त व्यवस्था है। आज भी अस्पताल में 20 किट उपलब्ध है। डेंगू के संदिग्ध मरीज की सीबीसी जांच करवाई जाती है, यदि एक लाख से 50 हजार के बीच अथवा उससे नीचे प्लेटलेट्स पाई जाती है, तो उसे संदिग्ध रोगी मानते हुए तत्काल उच्च चिकित्सा के लिए जोधपुर रैफर किया जाता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था मेडिकल कॉलेजों में ही उपलब्ध है।


यहां पनप रहे सर्वाधिक मच्छर
पोकरण क्षेत्र में ऐसे कई जल भराव स्थल है। यहां बारिश के दौरान लम्बे समय तक पानी तक ठहराव होता है। इनमें पोकरण, गुड्डी-थाट, लवां-पुरोहितसर रिण, भणियाणा भीम तालाब मुख्य स्थल है। यहां बारिश के दौरान सैंकड़ों बीघा भूमि पर पानी एकत्र होता है तथा महिनों तक जमा रहता है। यहां स्थित घनी झाडिय़ों व मीठे पानी के कारण मच्छर पनपते है। ऐसे में जब भी बारिश के दौरान जलभराव होता है, इस दौरान डिडाणिया, लवां, पुरोहितसर, धूड़सर, भणियाणा, जैमला, माड़वा, जालोड़ा पोकरणा, रातडिय़ा, पन्नासर, सरदारसिंह की ढाणी, फलसूण्ड क्षेत्र से मलेरिया व डेंगू के मरीज आते है।



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