कोटा. पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की ओर से शुरू किए गए राष्ट्रीय स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2018 के आधार पर अधिकतम जन भागीदारी के साथ शीर्ष स्थान पाने वाले जिलों और राज्यों को पुरस्कृत किया गया। वहीं कोटा जिला स्वच्छता में फिसड्डी रहा। कोटा जिले को देश में 388वीं रैंक हासिल हुई है। जिला परिषद सीईओ बी.एम. बैरवा ने रैंक जारी होने के बाद कहा, इसमें सुधार करेंगे।
राष्ट्रीय स्वच्छ सर्वेक्षण हरियाणा को सर्वश्रेष्ठ राज्य का खिताब दिया गया, जबकि महाराष्ट्र के सतारा जिले को स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2018 की रैंकिंग में सबसे अच्छे जिले का स्थान मिला। उत्तर प्रदेश को पेयजल और स्वच्छता के क्षेत्र में सर्वाधिक जनभागीदारी के लिए पुरस्कृत किया गया।
पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ने एक स्वतंत्र सर्वेक्षण एजेंसी के माध्यम से मात्रात्मक और गुणात्मक स्वच्छता मानकों के आधार पर भारत के सभी जिलों की रैंकिंग तय करने के लिए स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2018 की शुरुआत की थी। रैंकिंग तय करने के लिए स्कूलों, आंगनबाड़ी, पीएचसी, हाट, बाजार, और पंचायतों जैसे सार्वजनिक स्थलों और स्वच्छता के प्रति लोगों की धारणा और सुधार के लिए दिए गए सुझावों को आधार बनाया गया था।
स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण के तहत पूरे भारत में 685 जिलों के 6786 गांवों को शामिल किया गया था। इनमें 6786 गांवों में 27,963 सार्वजनिक स्थानों अर्थात स्कूल, आंगनबाड़ी, सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र, हाट, बाजार, धार्मिक स्थानों आदि का सर्वेक्षण एक स्वतंत्र एजेंसी ने किया था। संबंधित मुद्दों पर गांववासियों की प्रतिक्रिया जानने के लिए लगभग 18,2,531 नागरिकों का साक्षात्कार किया गया था। इसके अलावा एक एप के जरिए नागरिकों को स्वच्छता संबंधी मुद्दों पर ऑनलाइन प्रतिक्रिया देने के लिए भी कहा गया था। प्रत्यक्ष निरीक्षण से डेटा संग्रह सर्वेक्षण एजेंसी द्वारा सार्वजनिक स्थानों में स्वच्छता की स्थिति के भौतिक अवलोकन पर आधारित था। सर्वेक्षण एजेंसी ने फ ोटोग्राफ , वीडियो के साथ अपने अवलोकन और निष्कर्ष रिकॉर्ड करने के लिए नक्शे और सरल हैंड हेल्ड डिवाइस प रिकॉर्डिंग प्रारूपों का उपयोग किया।





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