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उम्मीद थी होगा काम पर मायूस होकर लौटे

सरकारी कार्मिकों की हड़ताल का व्यापक असर

श्रीगंगानगर. विधानसभा चुनाव की आहट को देखते हुए एक तरफ जहां विभिन्न राजनीतिक दल सक्रिय होकर चुनाव मैदान में आने की तैयारियां कर रहे हैं, वहीं विभिन्न सरकारी कार्मिकों के संगठनों ने सरकार से अपने वेतन या अन्य परिलाभों को बढ़ाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। पिछले चौबीस घंटे में अधिकांश सरकारी विभागों में कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल का इतना अधिक असर हो रहा है कि काम लेकर आने वाले परिवादी मायूस होकर वापस लौटने लगे हैं। राजस्थान रोडवेज के विभिन्न संगठनों ने तो प्रदेशभर में हड़ताल कर बसों की आवाजाही रोक रखी है। वहीं सरकारी विभागों में राज्य कार्मिकों के गैर हाजिर रहने से सरकार की जन कल्याणकारी योजनाएं धरातल पर पहुंच नहीं रही है।

परिवहन विभाग
नहीं खुले काउंटर
हनुमानगढ़ रोड पर जिला परिवहन विभाग में पिछले चौबीस घंटे में राज्य कार्मिकों की हड़ताल का व्यापक असर पड़ा है। यहां तक कि २३ में से १५ कार्मिक बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं। इन पन्द्रह कार्मिकों के पास ऑफिस के महत्वपूर्ण कामकाज संचालित करने की जिम्मेदारी भी है। इस कारण लाइसेंस बनवाने, लाइसेंस पुन: पंजीयन कराने, वाहनों के नम्बर लेने सहित अन्य कामकाज अटक गए हैं।
असर: जिला परिवहन अधिकारी सुमन और एक इंस्पेक्टर के सिवाय दो संविदा कार्मिक गुरुवार को जरूर अपना कामकाज करते नजर आए। लेकिन सामान्य दिनों में आने वाली भीड़ अब इस ऑफिस से गायब है। इक्का-दुक्का लोग आते जरूर हैं लेकिन फाइल नहीं निकलवाने के कारण उनका काम नहीं हो रहा। हालांकि डीटीओ लर्निंग लाइसेंस जैसे कामकाज खुद निपटा रही हैं।

जिला परिषद
एकाएक छाया सन्नाटा
जिला परिषद में आए दिन कामकाज को लेकर रहने वाला वातावरण अब सन्नाटे में तब्दील हो चुका है। इस कार्यालय में सत्रह से पन्द्रह मंत्रालयिक कर्मचारी हड़ताल पर है। राज्य सरकार ने जिले में विभिन्न योजनाओं में करीब ५२ करोड़ रुपए विधानसभा चुनाव में खर्च करने के लिए पिछले दिनों जारी किए थे, लेकिन इसकी अनुशंसा हड़ताल के कारण सिरे नही ंचढ़ पाई। यहां तक कि राज्य सरकार से विभिन्न योजनाओं के लिए बनाए गए प्रस्ताव भी अटक गए हैं।
असर: जिला परिषद पसिर में बीएडीपी, एमएलए कोटे, एमपी कोटे, एसबीएम, पंचायतीराज जैसी शाखाओं पर ताले लग चुके हैं। सीइओ जयपुर में हो रही बैठकों में गई हुई थी, यहां चार-पांच अधिकारी जरूर अपने कक्षों में बैठे लेकिन कामकाज के बजाय गप्पे हांक चले गए। ग्रामीण फरियाद लेकर आए लेकिन मायूस लौटे।

पंचायत समिति श्रीगंगानगर
गेट खोले पर कोई नहीं बैठा
पंचायत समिति के विकास अधिकारी, पंचायत प्रसार अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी भी अवकाश पर है। इस कार्यालय के बाहर पंचातीराज सेवा परिषद का धरना यथावत होने के कारण वहां चहल-पहल नजर आई लेकिन ऑफिस के अंदर कुर्सियां खाली पड़ी थी। कई कमरों के गेट तक नहीं खुले। पंचायतीराज कर्मचारियों और अधिकारियों की हड़ताल के चलते जिले की लगभग सभी ग्राम पंचायतों के ताले लग गए हैं। इससे आम आदमी परेशान हो रहे हैं।
असर: कुछ ग्रामीण अपने गांव में हो रहे अतिक्रमण हटाने के संबंध में आए लेकिन गेट पर ही बैठे आंदोलनकारियों ने सब छुट्टी की बात कही तो वापस चले गए। इस ऑफिस में छुट्टी जैसा माहौल नजर आया। यहां लोग आते हैं लेकिन गेट पर आकर ही लौट जाते हैं। गांवों में ग्राम विकास अधिकारी नहीं मिलने से नरेगा से जुड़े काम ठप हो गए हैं।

केन्द्रीय बस स्टैण्ड
नहीं सुनाई देती बसों की आवाज
केन्द्रीय बस स्टैण्ड पर ११ दिन से राजस्थान रोडवेज की ***** जाम हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। लंबी दूरी से लेकर आसपास ग्रामीण इलाके तक पहुंचने के लिए रोडवेज बसों के नहीं चलने से यात्री मायूस होकर लौट जाते हैं। बस स्टैण्ड के बाहर लोक परिवहन की बसों की आवाजाही अधिक हो गई है। एेसे में राजस्थान रोडवेज के अधिकारी सुबह और शाम सिर्फ हाजिरी के लिए आते हैं। रोडवेज हड़ताल के चलते निजी बसों के संचालकों की चांदी हो गई है।
असर: बस स्टैण्ड के अंदर किराए पर संचालित दुकानदारों का खर्चा निकल नहीं रहा है। वहीं लोक परिवहन बसों की ओर से मनमाने किराया वसूलने के संबंध में कोई शिकायत सुनने के लिए तैयार नहीं है। यात्रियों को भी मजबूरी में मुंहमांगा किराया देना पड़ता है। यात्री निजी वाहनों से भी गंतव्य तक पहुंच रहे हैं जिससे उन पर आर्थिक भार भी पड़ रहा है।

शिक्षा विभाग
डाक लेने तक सीमित
जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक और जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक कार्यालय में भी मंत्रालयिक कर्मचारियों की हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। इन दोनों कार्यालयों में अधिकारी और संविदा कार्मिक ही नजर आते हैं। मंत्रालयिक कर्मचारियों के नहीं आने से वहां संस्थापन, सूचना का अधिकार कानून, शिक्षा का अधिकार कानून जैसी शाखाओं के कक्षों पर ताले लग गए हैं। इस कार्यालय से जुड़े कामकाज ठप होने से अभिभावकों को अधिक परेशानी हो रही है।
असर: बाहर से आने वाले लोग दफ्तरों में कई कमरों पर जड़े हुए ताले देखकर लौट जाते हैं। कई अभिभावक पुरानी टीसी लेने के लिए पहुंचे तो वहां रटा-रटाया जवाब मिला कि हड़ताल टूटने पर आना। यहां तक कि डिस्पैच रजिस्टर में भी एंट्री नहीं होती। इस कार्यालय में डाक सिर्फ ली जा रही है उसकी एंट्री नहीं हो रही।



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