पाली . शहर में वन विभाग की शह पर मंडिया रोड क्षेत्र में कही जगह अवैध आरा मशीनें धड़ल्ले से चल रही है। इससे सरकार को लाखों का राजस्व का नुकसान हो रहा है वहीं इन आरा मशीनों की भेंट हरे-भरे पेड़ भी चढ़ रहे हैं। मामले की जानकारी वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को है लेकिन सब कुछ जानते हुए भी चुप्पी साधे हुए है। वन विभाग के अधिकारियों का इन अवैध आरा मशीनों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना अपने आप में बहुत कुछ कह रहा है।
जानकारी के अनुसार छह-सात आरा मशीनें वन विभाग की ओर से लाइसेंससुदा है। करीब १५ से १८ मशीनें अवैध रूप से शहर के शहर के मंडिया रोड कालू कॉलोनी, गुरलाई मार्ग, आशापुरा नगर, भैरूबाग, गांधी नगर, घरवाला जाव क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रही है। इनके पास न तो कोई लाइसेंस है और न ही आरा मशीनें चलाने के कोई आदेश। फिर भी यह आरा मशीनें धड़ल्ले से चल रही है। प्रतिदिन एक आरा मशीन पर सैकड़ों क्विंटल लकडिय़ां कटने के लिए आती है। कई मशीनों पर तो चोरी-छिपे प्रतिबंधित पीपल की लकडिय़ों को भी काटा जाता है।
2002 से आरा मशीनों पर रोक
राज्य की वन नीति के अनुरूप 20 प्रतिशत भू-भाग को वनाच्छादित करने के लक्ष्य प्राप्ति के लिए विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में अवैध आरा मशीनें सबसे बड़ी रोड़ा बन चुकी है। जिले में अवैध आरा मशीनों की जांच के लिए वन विभाग की ओर से पिछले कई वर्षों से कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा सकी है। जबकि उच्चतम न्यायालय के 2002 में अवैध आरा मशीनों को सख्ती से बंद करने के आदेश दे चुकी है। नए लाइसेंस देना तक बंद कर दिए गए है।
जांच तक नहीं
वैध आरा मशीन संचालक को लकड़ी चीरने के दौरान वृक्ष का नाम, प्राप्ति, स्वामित्व प्रमाण पत्र, चिराई के बाद आयतन और अवशेष का विवरण रजिस्टर में अंकित करना होता है। इसके अलावा आरा मशीन परिसर में सूचना पट्ट पर मशीन का आकार, ले आउट प्लान, लकडिय़ों का स्टॉक तथा लाइसेंस रखना आवश्यक है। लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले आरा मशीन संचालकों के खिलाफ कार्रवाई तो दूर वार्षिक जांच तक समय पर नहीं की जाती है।
जल्द करेंगे कार्रवाई
&शहर में अवैध रूप से आरा मशीनें चलने की शिकायत पूर्व में भी मिली थी। जल्द ही इनको चिह्नित कर कार्रवाई करवाएंगे।
एमडी सिंह, उपवन संरक्षक, पाली





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