औरंगाबाद की दो महिलाओं ने सोमवार दोपहर जयपुर स्थित हाईकोर्ट परिसर की सुरक्षा की पोल खोल दी। इन महिलाओं ने मनु की मूर्ति काफी ऊंचाई पर होने के बावजूद उस पर काले रंग का छिड़काव कर दिया। हालांकि इन महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन इनका एक पुरुष साथ फरार बताया जा रहा है। वीडियो फुटेज के आधार पर पुलिस ने इस युवक की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास शुरु कर दिए हैं।
सोमवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे अचानक दो महिलाएं आई और इनमें से एक महिला दूसरे के कंधों पर चढ़कर मूर्ति पर काला रंग स्प्रे करने लगी। यह देखकर हाईकोर्ट परिसर में हंगामा हो गया और वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी चिल्लाया। सुरक्षाकर्मी ने तुरन्त महिला सुरक्षाकर्मियों को बुलाया और दोनों महिलाओं को हिरासत में ले लिया। हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से इस बारे में अशोक नगर थाने में मामला दर्ज कराया गया है। इन महिलाओं ने मनु के प्रति अपनी नफरत जाहिर करने के लिए काले रंग का स्प्रे किया। पुलिस कार्रवाई के बाद हाईकोर्ट प्रशासन ने मूर्ति पर लगाया गया काला रंग साफ करवा दिया। इस घटना के बाद हाईकोर्ट परिसर में पुलिस की सतर्कता बढ़ गई है।
उधर, राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष अनिल उपमन व महासचिव संगीता शर्मा ने हाईकोर्ट प्रशासन से परिसर की सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबन्द करने तथा पुलिस से इस घटना को गंभीरता से लेते हुए गिरफ्तार महिलाओं को स्थानीय व राष्ट्रीय कनेक्शन तलाशने की मांग की है।
पहले भी मिली धमकियां
मनु की मूर्ति को लेकर लम्बे समय से विवाद चल रहा है। करीब 29 साल से हाईकोर्ट में याचिका लम्बित है, वहीं पिछले दिनों इस प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने जाने की धमकियां भी मिली थी। इन धमकियों के बाद यहां सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।
न्यायिक अधिकारियों के सहयोग से लगी थी प्रतिमा
हाईकोर्ट परिसर में 1989 में राजस्थान उच्चतर न्यायिक अधिकारी एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष पी के जैन ने हाईकोर्ट प्रशासन की अनुमति के बाद लॉयन्स क्लब के सहयोग से यह मूर्ति लगवाई थी। 28 जुलाई 1989 को हाईकोर्ट की पूर्णपीठ ने इसे हटाने का निर्णय किया। इसी बीच आचार्य धर्मेन्द्र व धर्मपाल आर्य ने मूर्ति को हटाने से रोकने को याचिका दायर की, जिस पर सितम्बर 1989 में न्यायाधीश एम बी शर्मा की बेंच ने मामला वृहदपीठ को भेज दिया और निर्णय होने तक मूर्ति को हटाने पर रोक लगा दी। इसके बाद 2015 में हाईकोर्ट ने इस मामले में केन्द्र सरकार को पक्षकार बनवाया और बाद में सुनवाई नहीं हो पाई है।





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