बीकानेर. महिला उत्पीडऩ न्यायालय एडीजे राजेश कुमार शर्मा ने दहेज हत्या के पांच साल पुराने मामले में पति व जेठ को दस-दस साल की सजा सुनाई है। अभियुक्तों पर तीन-तीन हजार रुपए जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर तीन माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अपर लोक अभियोजक योगेंद्र पुरोहित ने न्यायालय में कुल १६ गवाहों के बयान करवाए। बचाव पक्ष की दो गवाहों के बयान कराए गए, जबकि १७ दस्तावेज पेश किए गए। मृतका के पिता भवानी शंकर की आेर से अधिवक्ता रविकांत वर्मा ने पैरवी की। न्यायालय ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पति निर्मल एवं जेठ पवन कुमार को दोषी करार दिया। न्यायालय ने दोनों को ३०४बी में दस-दस साल और ४९८ में तीन-तीन साल की सजा सुनाई व तीन-तीन हजार रुपए का जुर्माना लगाया। दोनों सजाएं साथ चलेंगी।
यह है मामला
मोनिका की १२ मई, २०१३ में शादी हुई थी। शादी के सात महीने बाद ही एक दिसंबर, २०१३ को उसकी मौत हो गई। घटना के समय वह पांच माह के गर्भ से थी। इस पर मृतका के पिता भवानी शंकर की ओर से महिला थाने में पति निर्मल, जेठ पवन, सास व जेठानी के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया। पुलिस ने जांच में पति व जेठ को दोषी मानते हुए चालान पेश कर दिया। पुलिस ने पति निर्मल को १३ दिसंबर, २०१३ को गिरफ्तार कर लिया, तब से वह जेल में था। जेठ जमानत पर था।





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