रक्तिम तिवारी/अजमेर।
राजकीय आचार्य संस्कृत कॉलेज को अब तक राष्ट्रीय प्रत्यायन एवं मूल्यांकन परिषद (नैक) की ग्रेडिंग नहीं मिली है। अव्वल तो कॉलेज में पर्याप्त संसाधन, खेल मैदान और शिक्षक नहीं है। लोहागल रोड पर नया भवन बन चुका है। भवन और संसाधन जुटाने के बाद ही नैक टीम बुलाई जा सकती है।
यूजीसी ने 2014-15 से देश के सभी केंद्रीय, राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों, कॉलेज के लिए नैक ग्रेडिंग कराना अनिवार्य किया है। इसमें संस्कृत कॉलेज भी शामिल है। अजमेर में करीब 51 साल से गंज में राजकीय आचार्य संस्कृत कॉलेज संचालित है। कॉलेज सीमित संसाधनों और गिने-चुने शिक्षकों पर संचालित है।
नहीं है नैक ग्रेडिंग
संस्कृत कॉलेज को पिछले 20-22 साल में ग्रेडिंग कभी नहीं मिली। कॉलेज शुरू से सीमित संसाधनों में संचालित है। इसके अलावा बिल्डिंग में संस्कृत स्कूल भी चल रहा है। यहां शिक्षकों-विद्यार्थियों के लिए पार्र्किंग, खेलकूद सविधाएं, कैफेटेरिया, सेमिनार कक्ष और अन्य सुविधाओं का अभाव है। इसीलिए कॉलेज और सरकार ने कभी नैक टीम बुलाना उचित नहीं समझा।
जमा करा चुके 35 हजार
कॉलेज शिक्षा निदेशालय ने 2016-17 में सभी कॉलेज को नैक ग्रेडिंग लेने को कहा। इसकी अनुपालना में संस्कृत कॉलेज 35 हजार रुपए जमा करा चुका है। यहां शिक्षकों कमी, पर्याप्त भवन और संसाधन नहीं होने से टीम बुलाना मुश्किल है।
कॉलेज का नया भवन तैयार
लोहागल गांव में संस्कृत कॉलेज का नया भवन बन चुका है। इसका उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने शिलान्यास किया था। भवन करीब 6.5 करोड़ रुपए से बना है। इसमें प्राचार्य और शिक्षक कक्ष, कक्षाएं और अन्य सुविधाएं हैं। आचार संहिता लगने से भवन का उद्घाटन होना मुश्किल है। कॉलेज को 11 दिसम्बर तक इंतजार करना पड़ेगा।
फिर ही बुलाएंगे टीम
नए भवन में शिफ्टिंग के बाद कॉलेज प्रशासन सरकार, यूजीसी और नैक को पत्र भेजकर टीम बुलाएगा। यह प्रक्रिया शुरू होने तक साल 2019 आ जाएगा। फरवरी-मार्च के बाद लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कॉलेज को और इंतजार करना पड़ सकता है।





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