250 किलोमीटर का सफर तय करती है घग्घर नदी
रविकुमार शर्मा
जैतसर. हिमाचल प्रदेश की शिवालिक की पहाडिय़ों से निकलते हुए राजस्थान के हनुमानगढ़ एवं श्रीगंगानगर जिले में करीब ढाई सौ किलोमीटर तक के विस्तृत क्षेत्र में बहने वाली एवं कभी पवित्र सरस्वती नदी के बहाव का क्षेत्र रही जीबी क्षेत्र के लिए अमृतदायिनी घग्घर नदी में लंबे इंतजार के बाद आखिर गुरुवार को बरसाती पानी श्रीगंगानगर जिले की सूरतगढ़ सीमा क्षेत्र में पहुंच गया। जो सोमवार को जैतसर क्षेत्र पार कर गया।
गंगनहर के करणीजी वितरिका क्षेत्र की जीवनदायिनी कहलाने वाली एवं जीबी क्षेत्र के धान उत्पादक किसानों के लिए अमृत संचार का कार्य करने वाली घग्घर नदी किसी वरदान से कम नहीं है। घड़साना-अनूपगढ़ क्षेत्र तक पर्याप्त सिंचाई पानी नहीं मिलने व तेज गर्मी एवं उमस के कारण जब किसानों की फसल सूखने लगती हो तो घग्घर नदी का बरसाती पानी किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होता।
लेकिन इस बार उत्तर भारत में अपेक्षाकृत कम बरसात के कारण घग्घर नदी में महीनेभर की देरी से पानी पहुंचा है। इस पानी से श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ जिले में बड़े पैमाने पर फसलों को पुनर्जीवन मिलने की संभावना है।
खरीफ फसलों को मिलेगा लाभ
घग्घर में महीनेभर देरी से पानी आने के कारण धान का बीजान करने वाले किसानों को तो लाभ नहीं मिल पाया परन्तु पकाव पर पहुंच चुकी धान एवं नरमा-कपास की फसलों के लिए यह पानी किसी अमृत से कम साबित नहीं होगा।
प्रदेश में 250 किमी का है बहाव क्षेत्र- घग्घर नदी का कुल प्रवाह क्षेत्र करीब 600-700 किमी तक का है। यह नदी राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी तहसील के गांव तलवाड़ा झील से प्रवेश करते हुए हनुमानगढ़ व पीलीबंगा, श्रीगंगानगर जिले की सूरतगढ़ तहसील, श्रीबिजयनगर एवं अनूपगढ़ तहसील से होते हुए पाकिस्तान में प्रवेश करती है।
श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिलों में करीब दौ सौ पचास किलोमीटर तक के प्रवाह स्थल में हजारों बीघा भूमि में इस पानी से सिंचाई होती है। जून-जुलाई में उत्तर भारत में होने वाली बरसात के बाद प्रतिवर्ष जुलाई के प्रथम सप्ताह से इसमें बरसाती पानी का बहाव प्रारंभ हो जाता है लेकिन इस बार बारिश देरी से होने के कारण महीनाभर देरी से पानी आया है।
ओटू हैड पर रोका जाने लगा पानी
क्षेत्र के प्रगतिशील किसान रोहिताश बिश्नोई ने बताया कि किसी समय घग्घर नदी में इतना अधिक बरसाती पानी आता था कि उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता था। जिससे बाढ़ के भी हालात बन जाते थे। वर्ष 1988 एवं 1995 में घग्घर में आए अत्यधिक बरसाती पानी के कारण हनुमानगढ़ एवं श्रीगंगानगर जिले में भारी बाढ़ आ गई थी। लेकिन हरियाणा सरकार ने ओटू हैड से छह नहरें निकाल दी। जिससे घग्घर नदी का बहाव बहुत कम हो गया। इससे घग्घर नदी में साल दर साल पानी घटता जा रहा है। जिससे घग्घर क्षेत्र के धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।





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