- वीरवाल जैन समाज के 53 जनों ने 62वे अधिवेशन में ली शपथ
भीलवाड़ा।
अखिल भारतीय वीरवाल जैन समाज का 62 राष्ट्रीय अधिवेशन रविवार को शान्ति भवन में वर्धमान स्थाकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान व श्रमणसंघिय महामंत्री सौभाग्य मुनि के सान्निध्य में हुआ। अधिवेशन में देश के 767 वीरवालजनों ने हिस्सा लिया। इस दौरान 53 जनों ने अहिंसा दीक्षा व्रत धारण कर शपथ ली कि वे मांस, शराब का उपयोग करने वालो के साथ या उनके परिवार को बेटा या बेटी की शादी तक नहीं करेंगे। मांस, शराब व रात्रि भोजन नहीं करने का संकल्प लिया।
सौभाग्य मुनि ने कहा कि वीरवाल दिखावटी समाज नहीं है। अजैन होकर भी अहिंसा धर्म अपना बड़ी बात है। जहां आज कि पीढ़ी मांसाहार, मदिरा, व्यसन में डूबती जा रही है। इस बुराई को समाप्त किया जा सकता है, लेकिन धर्म से हिंसा निकालना मुश्किल, लेकिन नामुमकिन नहीं है। धर्म मे हिंसा का कोई स्थान नहीं है। वीरवाल समाज की नीव समीर मुनि ने 62 वर्ष पूर्व चित्तौडग़ढ़ में रखी थी। मदन मुनि ने कहा कि इन्द्रियों को बस में करना आसान काम नहीं है। यह वीरवाल समाज ने कर दिखाया है।
जैन धर्म सभी को जोड़ता है
अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अशोक पगारिया ने कहा कि जैन धर्म कोई भी अपना सकता है, क्योकि जैन धर्म जोडऩे में विश्वास रखता है, तोडऩे में नहीं। मुख्य अतिथि गजानंद वीरवाल ने अखिल भारती जैन वीरवाल ट्रस्ट चित्तौडग़ढ़ को एक लाख रुपए देने की घोषणा की। महिला जैन कॉन्फ्रेंस राजस्थान प्रांत अध्यक्ष लाड मेहता, जैन कॉन्फ्रेंस राष्ट्रीय मंत्री लता पंगारिया, मदनलाल वीरवाल, जगन्नाथ डागलिया, राजकुमार, मोहनलाल, जगदीश वीरवाल ने भी सम्बोधित किया। वीरवाल समाज के के महामंत्री मांगी लाल वीरवाल ने बताया कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र तथा गुजरात में हजारों परिवार अंहिसा व्रत को अंगीकार कर रहे हैं। उदयलाल सांखला ने आजिवन शिवव्रत धर्म अंगीकार करने की घोषणा की। इनका संघ की ओर से सम्मान किया गया। संचालन प्रकाश वीरवाल ने किया। माया वीरवाल, नबर्दा वीरवाल, हेमलता वीरवाल ने गीतगाकर अतिथियों अभिनन्दन किया। शांतिभवन अध्यक्ष अर्जुनलाल दुगड़, प्रदीप चौधरी, मदनलाल चौरिडिय़ा, कवंरलाल सूरिया, शांति जैन महिला मण्डल मंत्री सरिता पोखरणा, निर्मला सिंघवी, रिना सिसोदिया, मधु कोठरी आदि ने वीरवाल समाज का स्वागत कर अभिनन्दन किया।





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