पोकरण. तहसील मे इस बार मानसून की पर्याप्त बारिश नहीं होने से क्षेत्र मे अकाल के हालात बन रहे है तथा इस बार खेतों मे बुआई के बाद बरसात नहीं होने से क्षेत्र के किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। बारिश के मौसम मे औसत से भी कम बारिश होने से इस बार भी तहसील मे अकाल की स्थिति बन गई है। क्षेत्र मे पर्याप्त बारिश के अभाव मे लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। फसलों को नुकसान का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बारानी जमीन पर करीब 80 प्रतिशत बोई गई फसलें जलकर चौपट हो गई है, वहीं नलकूपों से खेती करने वाले किसानों को भी फसल खराबे से नुकसान उठाया पड़ा रहा है।
फसलों को नुकसान
तहसील मे इस बार जून से सिंतबर माह तक के चार महीनों मे करीब 133 एमएम बारिश ही हुई है, जो गत वर्ष की तुलना मे आधे से भी कम है। किसानों की ओर से बोई गई खरीफ की फसलें ग्वार, मोठ, तिल व बाजरी लगभग नष्ट हो गई है तथा रबी की फसलों की बुआई के बाद बारिश होगी या नही होगी, इस बात का भय किसानो क ो हर समय सता रहा है। जुलाई माह मे मामूली 25 से 30 एमएम बरसात होने से घुटनों तक फसले अंकुरित हुई थी, लेकिन बाद मे बारिश नहीं होने से जलकर नष्ट हो गई तथा कहीं कहीं किसानो के मामूली चारा हाथ आया। ।
सरकार ने मांगी एक माह मे गिरदावरी रिपोर्ट
सरकार ओर से भी उपखंड के करीब 194 गांवो कीे गिरदावरी पटवारियो के माध्यम से रिपोर्ट मंगाई है, जिसमे किसानों के फसलों के हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। गिरदावरी रिपोर्ट के लिए प्रशासन ने पटवारियों को 16 सितबंर से 15 अक्टूबर तक एक माह का समय दिया है। उसके बाद उपखंड मुख्यालय से जिला कलेक्टर को रिपोर्ट भेजी जाएगी तथा बाद में जिला कलेक्टर की अनुशंसा के बाद राज्य सरकार क्षेत्र के अकाल पीडि़तों के लिए कोई कार्य योजना तैयार कर राहत के प्रबंध व मुआवजे की व्यवस्था करेगी।
अकाल के मार के बाद भविष्य की चिंता
अकाल की मार झेल रहे किसान चारे, पानी व कर्ज की मार से किसान बुरी तरह से त्रस्त है। सरकारी इमदाद की दरकार लगाए बैठे किसानों को यह भय हर समय सताता रहता है कि अकाल की चपेट मे आने के बाद वर्ष भर अपना व अपने परिवार का पेट कैसे पालेंगे। जैसलमेर जिला सदैव अकाल का स्थायी घर रहा है तथा अकाल की मार से यहां का किसान कई बार रु-ब-रु हो चुका है। इस बार भी किसानों को बोई हुई फसलों का फायदा नहीं मिल सका। इस बार तहसील के हर क्षेत्र मे बारिश न के बराबर होने से किसानो के चेहरे पर चिंता की लकीरे स्पष्ट दिखाई देने लगी है।
सरकारी मुआवजे की दरकार, जिन्हे मिला उन्हे भी मामूली
सरहदी जिले के किसानो के खेतों मे फसलों का नुकसान तो हुआ ही है, साथ ही यहां के पशुधन का हाल भी बेहाल है। घास व चारे के संकट से जिले का पशुधन पूरी तरह से जूझ रहा है। सरकार की ओर से किसानो को कृषि बीमा योजना के तहत जो नुकसान की राशि का क्लेम पारित किया है। किसान बताते है कि वे ऊंट के मुंह मे जीरे के समान है। बीलिया गांव के नाथूसिंह, झाबरा के अर्जुनसिंह व झलोडा के खंगारसिंह बताते हैं कि सरकार की ओर से क्लेम की राशि पारित की जा रही है, वह किसानों के हुए फसलों के नुकसान से कहीं कम है।
नलकूपों पर भी खराबा
इसी प्रकार अजासर,दिधू व टोटा मे बरसात नहीं होने से 80 से 100 प्रतिशत फसले खराब होने के कगार पर है। यहां पर अकाल का साया मंडरा गया है। करीब दस हजार हैक्टर क्षेत्र में ग्वार, तिल, मोठ व बाजरे की फसलें बोई हुई थी, जो बारिश के अभाव में जलकर नष्ट हो गई है। इसी प्रकार तहसील के लोहारकी व छायण क्षेत्र में जहां पर नलकूप है, लेकिन वहां के किसानों की स्थिति अच्छी नहीं बताई जा रही है। बारानी भूमि से थोडी बेहतर बताई जा रही है, लेकिन जैसी किसानो को उम्मीद थी वैसा कोई फायदा होता नजर नहीं आया। यहां पर भी चारे की किल्लत है।
फैक्ट फाइल
-133 एमएम कुल बारिश दर्ज की गई है तहसील क्षेत्र में
-194 गंावों की संख्या में पोकरण तहसील क्षेत्र में
-6 लाख के करीब मवेशी मौजूद है पोकरण क्षेत्र में





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