आमेट. नगर पालिका मण्डल आमेट द्वारा केलवा मार्ग पर आयोजित पांच दिवसीय पशु मेले के तीसरे दिन शनिवार रात्रि को भीलवाड़ा के राजु रावल एण्ड पार्टी द्वारा प्रस्तुत किए गए रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का मेलार्थियों ने देर रात तक आनंद लिया।
कार्यक्रम में कलाकारों ने मोरियो बोल्यो रे देवजी के देवरे, सौ-सौ सूरमा में अकेलो बजरंगी, म्हारा कारज आज संवारो गणपति सभा में रंग बरसाओ सहित कई भजन एवं राजस्थानी गीतों की प्रस्तुतियां दी। इसके साथ ही कलाकारों ने आकर्षक नृत्य भी पेश किए। इस दौरान पालिका चेयरमैन नर्बदा देवी बागवान, वाइस चेयरमैन हेमलता तलेसरा, मेला कमेटी अध्यक्ष रतनसिंह राठौड़, समाजसेवी भरत बागवान, पालिका में प्रतिपक्ष के नेता प्रदीपसिंह राठौड़, पार्षद सुरेश टेलर, राजेश पालीवाल, यशंवत चोरडिया, श्रीकांत पारिक, अरूण मिश्रा आदि उपस्थित थे। इधर, मेले में दोपहर बाद से मेलार्थियों की भीड़ उमडऩा शुरू हुई, जो देर रात तक बनी रही।
आज अखिल भारतीय अटल कवि सम्मेलन
मेले में सोमवार रात्रि को अखिल भारतीय अटल कवि सम्मेलन होगा। इसमें कांकरोली के हास्यरस के कवि सुनील व्यास, मंदसौर के मुन्ना बैट्री, नाथद्वारा के कानू पंडित, वीररस के कवि भोपाल के सुमित ओरछा, लखनऊ के प्रख्यात मिश्रा, शुजालपुर के गोविन्द राठी, मंच संचालक आगरा की डॉ. रूचि चतुर्वेदी, गीत व शृंगार की नामली की सुमित्रा सरल एवं शायर व गजलकार उदयपुर के सम्पत कबीर रचनाएं पढ़ेंगे।
कोशिवाड़ा में निकली माता गोरज्या की शाही सवारी
-गवरी का गड़ावन महोत्सव देखने उमड़े श्रद्धालु
सेमा. क्षेत्र के कोशिवाड़ा व छोटा भाणुजा गांव में पिछले सवा महीने से चल रहे मेवाड़ के प्रसिद्ध लोक नृत्य गवरी के समापन को लेकर अम्बामाता मंदिर से सैकड़ों ग्रामवासियों व आदीवासी समाज के साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों व की उपस्थिति में माता गोरज्या की सवारी निकाली गई।
सवारी में मृण निर्मित सुन्दर व आकर्षक प्रतिमा को बड़े बाजोट पर सुसज्जित कर शाही सवारी के रूप में नगर परिक्रमा करवाकर मुख्य चौपाल पर विधि-विधान से बिराजित कर पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद शबरी समाज के कलाकारों ने थाली-मादल की की थाप के सथ देवी-देवताओं का आह्वान कर गवरी नृत्य किया। इसके बाद कलाकारों ने चौपाल पर गवरी महोत्सव देखने के लिए उमडे विशाल जन समुह का अपनी कला का प्रदर्शन कर खुब मनोरंजन किया। शाम पांच बजे बाद लोहे व काले कपड़े से तैयार किए गए नकली हाथी पर चित्तौडग़ढ़ के तत्कालीन हिन्दू राजा को बिठाकर मुगल बादशाह व उनकी फौज के साथ हुए भीषण युद्ध का जीवंत चित्रण कर दर्शकों को दिल थामकर देखने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान बड़ी संख्या ग्रामीण मौजूद थे।






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