जालोर. जवाई बांध से करीब ३ हजार एफसीएफटी पानी का उपयोग पाली जिले के तालाबों के भरण का सपना कितना सही है, इस बात की हकीकत इस बार मानसून की बेरुखी ने ही तय कर दी है। बाली विधायक और वर्तमान ऊर्जा राज्यमंत्री पुष्पेंद्रसिंह राणावत ने अपने क्षेत्र को लुभाने के लिए यह घोषणा की थी और प्रारंभिक तौर पर ऐसा प्रस्ताव सरकार को भी भिजवाया था, जिसमें जवाई बांध के 7 हजार एमसीएफटी पानी में से 3 हजार एमसीएफटी पानी का उपयोग रोहट, सोजत और सुमेरपुर के गांवों में तालाबों में भरने के लिए किया जाना था। सीधे तौर पर यह प्रोजेक्ट फिजिबल नहीं था, लेकिन केवल जनता केा लुभाने के लिए यह घोषणा की गई थी। प्रोजेक्ट कितना नकारात्मक और नुकसानदायक हो सकता है। यह बार मानसून की बेरुखी से साफ हो गया है। जवाई बांध अभी आधे से भी ज्यादा खाली है। जिससे पाली जिले को सालभर पर्याप्त पेयजल आपूर्ति भी नहीं हो पाएगी। जबकि बांध में वर्तमान में उतना पानी भी नहीं बचा है, जितने पानी से ऊर्जा मंत्री और वर्तमान बाली विधायक पुष्पेंद्रसिंह राणावत तालाबों में पानी भरने की बात कर रहे थे।
किसानों को नहीं मिल पाएगी पाण
जालोर और पाली जिले की जीवन रेखा माना जाने वाला जवाई बांध मानसून की बेरुखी से इस बार प्यासा है। इसका नुकसान इस बार सीधे तौर पर अभी से नजर आने लगा है। इस बार बुवाई के लिए किसानों को पाण भी नहीं मिल पाएगी। जवाई कमांड से जालोर जिले में मुख्य रूप से आहोर क्षेत्र में 22 राजस्व गांव जुड़े हैं, जिन्हें रबी की बुवाई के दौरान जवाई बांध से पानी मिलता है।
पुनर्भरण से पूर्व बेतुका प्रयास
जवाई की कुल भराव क्षमता 7 हजार एमसीएफटी है और वर्तमान हालातों पर गौर करें तो जवाई बांध बुश्किल 8 से 10 साल में एक बार ही पूरी तरह से भर पाता है। साथ ही उसके बाद ही गेट खोलने जैसी स्थिति बनती है। पिछले दो सालों को छोड़ दें तो जवाई के गेट इससे पूर्व लंबे समय तक वर्ष 2006 में ही खुले थे। जब जवाई बांध में पर्याप्त आवक का रिकार्ड ही नहीं है तो कुल भराव से आधे पानी से तालाबों को भरने की मंशा पर ही सवालिया निशान है।
जालोर के हक की उठ रही मांग, दूसरी तरफ राजनीति
पिछले दो सालों से लगातार जवाई बांध में अचानक अधिक आवक होने के बाद अधिक मात्रा में पानी छोडऩे से जालोर की जनता को खतरे का सामना करना पड़ा। वहीं किसानों को भी नुकसान हुआ। पिछले दो साल से किसान और स्थानीय लोग जवाई बांध के पानी पर हक निर्धारण की मांग कर रहे हैं। आमजन का कहना है कि पाली जिले के लिए 50 फीट तक पानी पर्याप्त है। इसके सरप्लस पानी पर जालोर जिले का हक निर्धारित हो। साथ ही जवाई नदी में निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ा जाए, जिससे नदी के किनारे सूखे पड़े कुएं रिचार्ज हो सके।
अभी मामला इसलिए महत्वपूर्ण
जालोर जिले को पेयजल के लिए जवाई बांध का पानी नहीं मिलता। केवल सिंचाई के लिए ही रबी की सीजन में इससे पाण मिलती है। जवाई बांध से सबसे अधिक लाभ पाली जिला ही उठाता है और सही मायने में जालोर के हक का पानी भी पाली जिले में ही काम आता है, लेकिन अतिवृष्टि के दौरान इस बांध से सबसे अधिक नुकसान जालोर को उठाना पड़ता है। ऐसे में वोट बैंक के लालच में आनन फानन में बिना भौगोलिक परिस्थितियों और जन भावना को समझ प्रस्तावित तालाब भरण प्रोजेक्ट रिपेरियन राइट का उल्लंघन था। लेकिन इस बीच इस साल मानसून की बेरुखी ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि बांध पर सियारत तकनीकी और वैज्ञानिक आधार को ताक पर रखकर करना कतई उचित नहीं है। ऐसा करने पर भविष्य के लिए बड़ा संकट का सामना करना पड़ेगा।
पहले जवाई पुनर्भरण जरुरी
जालोर की जनता और प्रबुद्धजन जवाई बांध के मामले में पहले ही कह चुके हैं कि बांध में पर्याप्त आवक नहीं हो रही है। ऐसे में बांध से नए प्रोजेक्ट नहीं जोड़े जाएं। यहीं नहीं अब समय आ चुका है कि बांध में पर्याप्त आवक के लिए जवाई पुनर्भरण की क्रियान्विति हो। पिछले माह गौरव यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने जवाई पुनर्भरण के लिए घोषणा जरुर की है, लेकिन यह घोषणा धरातल पर नजर नहीं आती, क्योंकि उससे पूर्व विधानसभा चुनाव है।
इनका कहना
इस साल जवाई बांध से रबी की सीजन में एक भी पाण नहीं मिल प ाएगी। कृषि क्षेत्र पूरी तरह से प्रभावित होगा। सीधेतौर पर यह किसानों को नुकसान है। पिछले साल जालोर बाढ़ से जूझ रहा था और अक्टूबर तक नदी में भी पानी बह रहा था, लेकिन इस बार सूखे के हालात है और उसी जवाई बांध से पानी नहीं मिल पाएगा। अब समय आ गया है कि जालोर के किसानों के हितों के लिए जवाई बांध के पानी में से निर्धारित मात्रा में पानी पर जालोर का हक निर्धारित हो।
- ईश्वरसिंह थुंबा, किसान नेता
केवल पेयजल सप्लाई
जवाई बांध में पर्याप्त पानी नहीं है। वर्तमान में 2100 एमसीएफटी पानी उपलब्ध है। ऐसे में इस बार सिंचाई के लिए पाण उपलब्ध नहीं हो पाएगी।
चंद्रवीरसिंह, एक्सईएन, जवाई बांध





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