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बढ़ते खर्च आैर फ्राॅड को लेकर पेमेंट कंपनियों की चिंता, आरबीआर्इ का आदेश मानने से कर रहीं आनाकानी

नर्इ दिल्ली। वैश्विक डिजिटल पेमेंट कंपनियों को अनुमान है कि भारत में डेटा स्टोर करने से उनके आॅपरेटिंग काॅस्ट (संचालन खर्च) में भारी इजाफा होगा। इसके साथ इन कंपनियों का कहना है लोकल स्तर पर डेटा स्टोर करने से डेटा चोरी होने का खतरा बढ़ जाएगा। एक वैश्विक पेमेंट कंपनी के दो वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इन पेमेंट कंपनियों के लिए जो सबसे बड़ी चुनौती साइबर अटैक के खतरे से बचने की है। इनमें से एक अधिकारी का कहना है, "जब डेटा एक ही जगह केंद्रित होने से उनका देखभाल करना आसान होता है। कर्इ जगहों पर स्टोर किए डेटा काे लेकर असुरक्षा का खतरा बना रहता है।"


भारतीय कंपनियां आरबीआर्इ के फैसले से खुश

गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआर्इ) ने अप्रैल माह में आदेश दिया था कि सभी वैश्विक कंपनियों को भारतीय लाेगों के लेनदेन से संबंधित सभी डेटा को भारत में ही स्टोर करना होगा। आरबीआर्इ ने इन कंपनियों को भारत में ही डेटा स्टोर करने के लिए 6 महीने की मोहलत दी थी। आरबीआर्इ के इस कदम का देसी पेमेंट कंपनियों ने स्वागत किया है। अब जबकि आरबीआर्इ द्वारा दी गर्इ मियाद बीत चुकी है, एेसे में वीजा, मास्टरकार्ड व पेपल जैसी कंपनियों के लिए परेशानियां खड़ी हो गर्इ है।

Data Security

ट्रांजैक्शन टाइम आउट होने का खतरा

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन पेमेंट कंपनियाें ने डेटा लोेकेलाइजेशन को लेकर अपना प्लान आरबीआर्इ को सबमिट कर दिया है। साथ ही आरबीआर्इ को कहा है कि वो अगले 9 से 12 महीनों के अंदर भारत में डेटा स्टोर करने की प्रक्रिया को शुरू कर देंगी। एक अधिकारी के मुताबिक, डेटा लोकालाइजेश को लेकर सबसे बड़ी परेशानी ट्रांजैक्शन टाइम आउट होने की होगी। खासकर क्राॅसबाॅर्डर पेमेंट में एेसे होने की अधिक संभावना है। पेमेंट कंपनियां किसी भी ट्रांजैक्शन को पूरा करने से पहले कर्इ तरह की बातों व मापदंडों की जांच करती हैं। एेसे में यदि इन ट्रांजैक्शन का एक हिस्सा भारत में व दूसरो किसी अन्य देश में हो रहा है ट्रांजैक्शन टाइम आउट होने का अंदेशा बना रहता है। इन कंपनियों के लिए जो दूसरी सबसे बड़ी मुश्किल होगी वो ये कि उन्हें लोकल डेटा स्टोरेज की व्यवस्था करनी होगी। एेसेें में उनकी संचालन खर्च में बढ़ोतरी होगी।


क्या है विशेषज्ञों का कहना

बता दें कि आरबीआर्इ के इस फैसले से व्हाट्सएेप पेमेंट प्रोजेक्ट भी अधर में लटका है। इसके साथ ही अमेजन के यूपीआर्इ पेमेंट्स को भारत में शुरू करने का प्रस्ताव भी लटका है। इस मामले से संबंधित जानकारों का कहना है कि आरबीआर्इ के इस फैसले से वैश्विक कंपनियों को प्रतिस्पर्धा के मोर्चे पर यह एक बड़ा डिसएडवांटेज है। क्योंकि भारत में ही देसी पेमेंट कंपनियों का अच्छा खासा बाजार है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि वो इस बात से सहमत हैं कि इससे वैश्विक कंपनियों की खर्च बढ़ जाएगी लेकिन यह कहना गलत होगा कि अन्य जगहों के मुकाबले भारत में डेटा स्टोर करन असुरक्षित होगा। लोकल स्तर पर भी डेटा को सुरक्षित रखा जा सकता है, बस जरूरत है तो इन कंपनियों को इसपर खर्च करने की।



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