हिण्डौनसिटी.
दशहरा पर दहन से पहले रावण राम के अग्नि वाण से बचाने के लिए ढाल घुमाएगा। साथ ही गुुस्से में दशानन अंगारों से लाल आंखें कर मुंह से आग उगलेगा। नगर परिषद की ओर से आयोजित होने वाले दशहरा महोत्सव में कुछ अंदाज में मेघनाद और कुम्भकरण के साथ खड़ा रावण का रिमोट चालित पुतला एक हाथ से ढाल घुमाते हुए अट्टहास भी करेगा।
इसके लिए मध्यप्रदेश के मुरैना से आए विशेषज्ञ कारीगर 20 दिन से 61 फीट ऊं चे रावण और 35- 40 फीट ऊंचे अन्य दो पुतलों को तैयार करने में जुटे हैं। करीब दो लाख रुए की लागत से रावण मेघनाद और कुंभकरण के पुतले दशहरे से एक दिन पहले 18 अक्टूबर तक बन कर तैयार होंगे।
बजाजों की धर्मशाला के पिछवाड़े में रामलीला व दशहरा आयोजन से जुड़े लक्ष्मण प्रसाद शर्मा व खन्ना छापरिया की देखरेख में आठ कारीगरों के दल द्वारा पुतलों का निर्माण किया जा रहा है। पुतले बना रहे गोपाल महावर व अजीज खां ने बताया कि वे ढाई दशक से रावण के पुतला बनाने का काम करते हैं। कोटा के दशहरा मेला सहित देश के ख्यात मेलों में उनके द्वारा पुतले तैयार किए गए। गोपाल ने बताया कि आठ कारीगरों की टीम के साथ वे तीन सप्ताह से रावण का पुतला तैयार करने में व्यस्त हैं। हर रोज छह से आठ घंटे जुटे रहने पर तीनों पुतले 25 दिन में तैयार हो पाते हैं। उन्होंने बताया कि रिमोट चालित इलैक्ट्रॉनिक उपकरण से रावण के पुतले के हाथ में लगी ढाल घूमेगी। वहीं दहन से ऐन पहले राम से युद्ध के दौरान रावण के पुतले की आंखों को लाल बल्बों से गुस्से में सुर्ख दिखाया जाएगा।
250 बांस और दो क्विंटल रद्दी से बन रहा रावण-
लक्ष्मण शर्मा ने बताया कि रावण सहित अन्य दो पुतलोंं के निर्माण में 250 से अधिक बांस व 15 बल्लियां खप गई हंै। इसके अलावा बांस-बल्लियों से बने ढांचे को सजाने संवारने में एक क्विटंल अखबार की रद्दी व एक क्विंटल टाट-बोरी लग गए हैं।
जलसेन पेटे में होगा रावण दहन-
विजय दशमी पर रामलीला मैदान के पास जलसेन के पेटे में रावण के पुतले का दहन होगा। जलसने में पानी का भरा होने की वजह से पेटे के सूखे स्थान पर पहुंचने के लिए समतली करण कर रामलीला मैदान से रास्ता बनाया गया है। दशहरा महोत्सव आयोजन से जुड़े खन्ना छापरिया ने बताया कि दशहरे से एक दिन पहले पुतलोंं को क्रेन से दहन स्थल पर खड़ा किया जाएगा।
10 फीट बढ़ा रावण का कद-
बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने के लिए इस बार रावण के कद में 10 फीट इजाफा हुआ है। गत वर्ष 51 फीट ऊंचा रावण था, जबकि इस वर्ष तैयार हो रहा पुतला 61 फीट का है। वहीं मेघनाद 35 फीट और कुम्भकरण का पुतला 40 फीट ऊंचाई का है।





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