अलवर. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अलवर से पुराना नाता रहा है। यही कारण है कि आजादी के पहले के दौर में गांधी जयंती पर सप्ताह भर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता था। उसी दौर में अलवर में प्रजामंडल की स्थापना भी हुई। जिले के लोगों में महात्मा गांधी के प्रति अटूट श्रद्धा का भाव था।
अलवर के इतिहास के जानकार एडवोकेट हरिशंकर गोयल बताते हैं कि महात्मा गांधी का अलवर में कोई कार्यक्रम तो नहीं हुआ, लेकिन वे 15 मार्च 1939 को ट्रेन से अलवर के रेलवे स्टेशन से गुजरे जरूर। इस दौरान अलवर की जनता ने मास्टर भोलानाथ के नेतृत्व में रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर महात्मा गांधी का स्वागत किया। महात्मा गांधी का अलवर से लगाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है, जब पूर्व विधायक पं. भवानीसहाय शर्मा को क्रांतिकारी गतिविधियों में आठ साल की जेल हुई तो राष्ट्रपिता गांधी के प्रयास से ही वे जेल से छूट पाए। इसी तरह नीमूचाना गोलीकांड के दौरान भी उन्होंने हरिजन व नवयुग समाचार पत्रों में गोलीकांड की पूरी जांच कराने की जरुरत बताई और आजादी के आंदोलन से जुड़े लोगों से सहयोग की अपील की। वहीं क्रांतिकारी गणेश शंकर विद्यार्थी को गोलीकांड प्रकरण की रिपोर्ट तैयार करने के लिए छिपाकर अलवर भेजा। बाद में विद्यार्थी ने ने जुलाई 1925 में समाचार पत्र में नीमूचाना गोलीकांड का विवरण प्रकाशित किया। अलवर में अनेक नेताओं का महात्मा गांधी से गहरे सम्बन्ध रहे।
यही कारण है कि राष्ट्रपिता गांधी के प्रति अलवर की जनता में श्रद्धा थी और गांधी जयंती के आयोजन उत्साह से मनाए जाते थे। गोयल बताते हैं कि वर्ष 1944 से 46 तक अलवर में गांधी जयंती पर एक सप्ताह तक विभिन्न आयोजन होते थे। इनमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते थे। लोगों में गांधी जयंती को लेकर खासा उत्साह रहता था। आजादी के बाद भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति अलवर के लोगों में गहरी श्रद्धा है और सरकारी एवं गैर सरकारी स्तर पर हर साल गांधी जयंती पर आयोजन एवं पुष्पांजलि कार्यक्रम होते रहे हैं। वर्तमान में नगर परिषद अलवर में स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि व अन्य कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल
होते हैं।





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