नई दिल्ली। यूपीए के सहयोगी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार द्वारा रफाल पर दिए गए बयान ने उनकी ही पार्टी में भूचाल ला दिया। मोदी के 'समर्थन' में बयान देकर पवार ने अपनी से पार्टी से तारिक अनवर जैसे तेज-तर्रार नेता तक खो दिया। इसके बाद अब शरद पवार ने अपने बयान पर यू टर्न लिया है और कांग्रेस की ओर से की जा रही जेपीसी की मांग को दुहराया है।
रफाल सौदे की हो जांच: शरद पवार
महाराष्ट्र के बीड में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा कि उन्होंने कभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन नहीं किया है। पीएम को कोई क्लीन चिट नहीं और न ही ऐसा करेंगे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार रफाल सौदे की कीमत बताए। 2013 में जब एक रफाल जेट की कीमत 650 करोड़ रूपए थी तो मोदी सरकार ने इसे 1600 करोड़ रूपए में क्यों खरीदी। पवार ने इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मांग दोहराते हुए कहा कि सरकार को इस सौदे की जांच के लिए जेपीसी का गठन करें और दस्तावेज सौंपे।
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मोदी की नियत पर शक नहीं: पवार
बता दें कि एक मराठी चैनल के दिए गए अपने इंटरव्यू में एनसीपी प्रमुख शरद पवार गुरूवार को कहा है कि मुझे निजी तौर पर लगता है कि लोगों के दिमाग में प्रधानमंत्री की नीयत को लेकर कोई शक नहीं है। पवार ने कहा कि रफाल की तकनीकी जानकारी की मांग करना उचित नहीं है लेकिन सरकार को रफाल का दाम बताने से गुरेज नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने जिस तरह सरकार का पक्ष रखा उससे लोगों के दिमाग में भ्रम पैदा हुआ लेकिन अब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार का पक्ष साफ-साफ रखा है।
मोदी पर सीधा हमला बोल रहे कांग्रेस अध्यक्ष
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी रफाल को लेकर लगातार पीएम मोदी पर हमला कर रहे हैं। वे कई सभाओं में कह चुके हैं कि देश का चौकीदार चोरी कर रहा है। लगातार हमलों के बाद भोपाल की एक सभा में कांग्रेस को जवाब दिया। मोदी ने रफाल का जिक्र किए बिना कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा कि देश में गठबंधन करने में सफल न होने वाली देश की सबसे पुरानी पार्टी दुनिया के देशों से गठबंधन कर रही है। कांग्रेस के इस रवैए को देश के जागरूक नागरिकों को समझना होगा।
तारिक अनवर ने दे दिया इस्तीफा
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक नेताओं में से एक और कटिहार से सांसद तारिक अनवर ने 28 सितंबर को पार्टी और लोकसभा से इस्तीफा दे दिया। तारिक ने कहा कि उन्होंने पार्टी प्रमुख शरद पवार द्वारा रफाल मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के बयान से असहमत होने के कारण यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि मैं राकांपा और यहां तक कि लोकसभा सदस्यता से भी इस्तीफा देता हूं, क्योंकि मैं रफाल सौदे में मोदी को समर्थन देने वाले शरद पवार के बयान से पूरी तरह असहमत हूं।





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