उदयपुर. हल्दीघाटी कला संगम की ओर से आयोजित नेशनल आर्ट सिम्पोजियम के तहत आठ दिवसीय कार्यशाला हल्दीघाटी स्थित महाराणा प्रताप संग्रहालय में कला प्रदर्शनी संग सम्पन्न हुई। इस मौके पर आयोजक डॉ. मोहनलाल श्रीमाली ने बताया कि इस कार्यशाला में महाराणा प्रताप के जीवन से संबंधित विभिन्न प्रसंगों को चित्रकारों ने बहुत ही आकर्षक रूप से संयोजित कर प्रदर्शित किया है। जिसे न केवल देश-दुनिया के सैलानी हमेशा सराहेंगे बल्कि नई पीढ़ी इनसे प्रेरणा पाएगी।
इनकी कृतियां हुईं प्रदर्शित
कला मित्र संगम अध्यक्ष एवं कार्यशाला संयोजक दिनेश कोठारी ने बताया कि इस कार्यशाला में मेवाड़ की पारंपरिक लघुचित्र शैली में उदयपुर एवं नाथद्वारा के साथ-साथ समकालीन शैलियों की कलाकृतियां सृजित की गईं। इसमें शंकर कुमावत ने हल्दीघाटी युद्ध का दृश्य और जगदीश नन्दवाना ने पन्नाधाय के बलिदान से संबंधित चित्र बनाए। इसी तरह, डॉ. जगदीश कुमावत द्वारा प्रताप के वनवासी जीवन का चित्रण, गिरीश शर्मा द्वारा हल्दीघाटी युद्ध के दृश्य तथा सुरेश शर्मा के दानवीर भामाशाह के प्रसंग का चित्रण प्रभाव छोड़ते हैं। इधर, विवेक जोशी ने फड़ शैली में महाराणा प्रताप के जीवन को श्रृखंला बद्ध चित्रित किया। वहीं, डॉ. भावना श्रीमाली ने चित्तौड़ के जौहर का चित्रण तथा दिनेश कोठारी ने अश्वारूढ़ महाराणा प्रताप की चित्ताकर्षक कलाकृति का सृजन किया।इनके अलावा मनदीप शर्मा ने प्रताप को शेर से लड़ते दिखाया। तो नरेन्द्र सिंह चिन्टू ने हल्दीघाटी युद्ध में प्रताप द्वारा मुस्लिम महिला के साथ दिखायी गई सद्भावना का चित्रण किया। भूपेन्द्र शर्मा ने मेवाड़ के श्री बप्पारावल एवं श्री एकलिंगनाथ प्रभु तथा मनीष शर्मा ने स्वामी भक्त अश्व चेतक के अन्तिम समय का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया।
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ये सब रहे उपस्थित
समापन समारोह के दौरान मुख्य अतिथि कलाविद पुरस्कार से सम्मानित प्रो. सुरेश शर्मा सहित अतिरिक्त जिला कलेक्टर, राजसमन्द राकेश कुमार, सेवानिवृत आरएएस बीआर भाटी, अतिरिक्त आबकारी आयुक्त, अजमेर कैलाश लखारा, प्रो. लक्ष्मीलाल वर्मा, शंकर मालवीय के अलावा अनेक कलाप्रमी उपस्थिति थे।






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