अरविन्द सिंह शक्तावत
जयपुर। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फैक्टर भले ही नजर आए, लेकिन इस बार मोदी मुख्य चेहरा नहीं होंगे। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इस बार तीनों बड़े हिन्दी भाषी राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मोदी की सभाएं तुलनात्मक आधार पर कम करने का निर्णय किया है।
राजस्थान में तो मोदी की जनसभाएं पिछली बार की तुलना में आधी से भी कम होंगी। 2013 के विधानसभा चुनावों से पहले ही मोदी को भाजपा चुनाव प्रचार अभियान समिति का प्रमुख बनाया गया था। उस समय उन्होंने राजस्थान में 21 सभाएं की थीं। पिछले दिनों अमित शाह ने तीनों राज्यों के प्रमुख नेताओं को साफ कर दिया है कि हिन्दी भाषी तीनों राज्यों में मोदी की ज्यादा सभाएं नहीं करवाई जाएंगी। छत्तीसगढ़ में 5 से 7, म ध्यप्रदेश में 7 से 10 और राजस्थान में 9 से 12 सभाएं ही होंगी।
हालांकि, राज्य के नेता इस प्रयास में जुटे हैं कि कैसे भी मोदी की सभाएं ज्यादा से ज्यादा हों। भाजपा की नजर सिर्फ विधानसभा चुनाव पर नहीं है, बल्कि उसका अंतिम लक्ष्य 2019 का लोकसभा चुनाव है। इस महामुकाबले से पहले भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अपने सबसे बड़े स्टार प्रचारक को दांव पर नहीं लगाना चाहता। अत: तीनों राज्यों में मुख्यमंत्रियों के चेहरे को आगे रखकर पूरा चुनाव लड़ा जाएगा।
अब तक दो सभाएं कर चुके हैं मोदी
राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक दो सभाएं कर चुके हैं। पहली सभा जयपुर में हुई। इसे लाभार्थी सम्मेलन का नाम दिया गया और सभा सरकारी बताई गई। दूसरी सभा अजमेर में हुई जो पूरी तरह से चुनावी रही। मोदी की सभाओं का प्लान इस तरह से तैयार करवाया जा रहा है, जिससे वह बचे हुए संभागों में जा सकें। आलाकमान ने अब तक मोदी की 9 सभाओं को ही मंजूरी दी है।
मुख्यमंत्री को 100 सभाएं करने को कहा
राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे 65 सभाएं करना चाहती थीं लेकिन शाह ने कहा है कि कम से कम 100 सभाएं करें। 2013 में राजे ने चुनावों की घोषणा के बाद 87 सभाएं की थीं।
अमित शाह राजस्थान को दस दिन देंगे
अमित शाह ने राजस्थान में अभी दस से बारह सभाएं करने पर हामी भरी है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि चुनाव से पहले के दस दिन में जितनी सभाएं करवाना चाहते हैं, वे उसके लिए तैयार हैं।





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