युगलेश शर्मा की रिपोर्ट
मेयो कॉलेज सहित कई नामी शिक्षण संस्थाएं और इंड्रस्ट्रीयल एरिया जहां की शान है, वहां के ही युवा रोजगार और शिक्षा के लिए दूसरे शहरों की ओर से पलायन को मजबूर हैं। हम बात कर रहे हैं शैक्षणिक और धार्मिक नगरी अजमेर के दक्षिण विधानसभा क्षेत्र की। स्मार्ट सिटी में शामिल इस क्षेत्र के लोग जहां पेयजल किल्लत जैसी समस्याओं से दो-चार हो रहे हैं वहीं कई लोग तो बारिश के मौसम में यह दुआ करते हैं कि कहीं बरसात ज्यादा नहीं हो जाए, वरना उनके घर में उठने-बैठने की जगह भी नहीं बचेगी।
महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल का यह निर्वाचन क्षेत्र है। वह यहां से लगातार तीन चुनाव जीत चुकी हैं। चुनावी मौसम में जमीनी हकीकत जानने जब मैं इस क्षेत्र में पहुंचा तो यहां मतदाताओं का दर्द छलक पड़ा।
इस क्षेत्र के आदर्शनगर में मैं एक स्टेशनरी की दुकान पर रुका, वहां बातचीत के दौरान चुनावी माहौल जानना चाहा तो दुकानदार नरेन्द्र सिंह नयाल मुखर हो गए। बोले 'आप खुद ही देख लो, बोर्ड लगाने से कोई स्मार्ट सिटी नहीं बन जाती। रोजगार तो है नहीं, नौकरी के लिए बच्चे बाहर जा रहे हैं।
फैक्ट्रियां खुलनी चाहिए, कंपनियां आनी चाहिए, उद्योग-धंधे होंगे तो ही तो आदमी के पास पैसा आएगा। मैंने उनकी बात काटते हुए पूछ लिया कि आप की तो दुकान है, आप क्यों दु:खी हो? इस पर नयाल का जवाब था मार्केट की हालत देख लो, त्योहारी सीजन में भी 1000-1200 रुपए का गल्ला उठ रहा है।
जब लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसे ही नहीं होंगे तो मार्केट कैसे चलेगा। यहां की तो स्थिति यह है कि किसी को नौकरी मिल भी गई तो 400-500 रुपए से ज्यादा नहीं मिल पाते, इतने में तो वह अपना घर का खर्चा ही निकाल पाएगा... और एक बात बताऊं बेरोजगारी के कारण ही आज चोरी की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
यहां से आगे बढ़ा तो सेंट फ्रांसिस स्कूल के सामने पंक्चर की दुकान पर कुछ लोग चुनावी चर्चा करते दिखे। मैं भी शामिल हो गया। प्रेमचंद गोदारा बोले 'बीसलपुर परियोजना तो अजमेर के लिए ही बनी थी, फिर भी 72 घंटे के अंतराल से पानी आ रहा है...सीवर लाइन को ले लो, बिजली के बिल में राशि तो जुड़कर आ रही है पर सीवर का अता-पता ही नहीं।' वहीं बैठे दिनेश कुमार बोलने लगे 'कोई निहाल नहीं करता साहब, इन नेताओं के वादों के कोई सिर-पैर नहीं होते...।'
दिनेश का इतना बोलना था कि दुकानदार भगवान सिंह सब कुछ छोड़ कर वहां आ गए और बात काटते हुए बोले 'आप बताओ भाईसाहब बीपीएल कार्ड किसका बनता है, उसी का न जो बिल्कुल गरीब हो? लेकिन बीपीएल कार्ड का मजा वो लोग ले रहे हैं जो बिल्कुल मजे में हैं। 'भगवान यहीं नहीं रुके कहा 'मैं पंक्चर का काम करता हूं मेरा अंगूठा घिस गया, पॉस मशीन में फिंगर प्रिंट नहीं आ रहे।
कोई सुनवाई ही नहीं, राशन नहीं मिल रहा। गैस सिलेंडर की सब्सिडी नहीं मिल रही, सब्सिडी देनी ही नहीं तो फिर बैंक के चक्कर क्यों लगवाए।' प्रेमचंद फिर बोले 'भजनगंज में रहने वाली शीला की विधवा पेंशन ६ माह से बंद है। विधायक -पार्षद को भी कह दिया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।'
आगे बढ़ा तो चाय की दुकान पर महेंद्रसिंह यादव से मिला। वह बोले 'जहां पिछले डेढ़-दो महीने से रोड लाइटें बंद पड़ी है, आप क्या उम्मीद करोगे...पिछले दिनों विधायक खुद यहां आई थीं, किसी ने समस्या कागज पर नोट भी की लेकिन आज भी लाइटें बंद हैं, सफाई के हाल तो आप देख ही रहे हो।'
गुलाबाड़ी पर कपड़े प्रेस की दुकान पर खड़े रमेश बोले 'साहब, सब अपने घर भर रहे हैं, पब्लिक का पैसा कहां जा रहा है, पता ही नहीं, कौनसी समस्या ऐसी है जो नहीं मिलेगी...राजाकोठी के पास स्कूल में पानी भरता है, लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है, सफाई कर्मचारी आते ही नहीं हैं, निचली बस्तियों के हाल सबसे खराब है, बारिश के दिनों में उनके घरों में पानी भर जाता है, हालात यह होते हैं कि लोगों को रात बिताने के लिए दूसरी जगह शरण लेनी पड़ती है।





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