रक्तिम तिवारी/अजमेर.
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में दो साल से सत्यार्थ सभागार (ऑडिटेरियम) नहीं बन पाया है। कामकाज की धीमी गति को देखते हुए इसका अगले साल भी तैयार होना मुश्किल है। ऐसे में शहर एक शानदार सभागार से वंचित रह सकता है।
विश्वविद्यालय में स्टाफ क्वार्टर से सटी जमीन पर करीब 1 हजार सीटों की क्षमता का हाईटेक सभागार निर्माणाधीन है। 14 अगस्त 2016 को मुख्यमंत्री वसुंधरार राज ने ‘सत्यार्थ सभागार’ का शिलान्यास किया था। इनमें विक्रम साराभाई और अमृतायन भवन तो तैयार हो चुके हैं।
लेकिन सत्यार्थ सभागार का कामकाज ही एक साल तक शुरू नहीं हो पाया। पिछले साल लोकसभा उपचुनाव की सुगबुगाहट हुई तो राजस्थान स्टेट रोड डवेलपमेंट कॉरपॉरेशन ने सभागार का काम शुरू किया
विवि दे चुका दो करोड़ रुपए
1989-90 से विश्वविद्यालय में सभी भवन राजस्थान स्टेट रोड डवेलपमेंट कॉरपॉरेशन बनवा रहा है। सत्यार्थ सभागार का काम इसको ही सौंपा हया। विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान से प्राप्त 2 करोड़ रुपए का भुगतान भी कर दिया। लेकिन कॉरपॉरेशन एक साल तक राशि लिए बैठे रहा। तत्कालीन कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने नाराजगी भी जताई। लेकिन कॉरपेशन ने उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद ही कार्य प्रारंभ किया।
धीमी गति से बनता सभागार
1 हजार सीट वाले सत्यार्थ सभागार पर करीब 20 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के राजीव गांधी भवन से भी अत्याधुनिक होगा। इसमें सेंट्रल ए.सी. आरामदायक कुर्सियां, प्रोजेक्टर, स्क्रीन, हाइटेक साउंड सिस्टम, अग्निशमन यंत्र और अन्य संसाधन जुटाए जाएंगे। लेकिन सभागार का कामकाज धीमी गति से चल रहा है। अभी इसका ढांचा ही तैयार हो पाया है। कामकाज की गति को देखते हुए इसके 2019 या इसके बाद ही तैयार होने की उम्मीद है।





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