चंदनसिंह देवड़ा/ उदयपुर. अमृृतसर रेल हादसे के बाद देबारी स्थित दो सरकारी स्कूलों के बच्चों,अभिभावकों और शिक्षकों की चिंताएं इसलिए बढ़ी हुई है कि यहां स्कूल की डगर रेलवे लाइन लांघ कर पार करनी पड़ती है। इस रेल लाइन के दोनों छोर पर उच्च माध्यमिक और प्रारंभिक स्कूल स्थित है। आम रास्ता होने के बावजूद यहां अंडर ब्रिज नहीं है जिससे हर पल ट्रेन की सिटी के साथ डर सताता है कि कहीं कोई बच्चा रेलवे ट्रेक पर नहीं हो।
शहर से सटे देबारी गांव में ब्रोडगेज लाइन गुजर रही है। इसके एक तरफ राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय और एक निजी विद्यालय के परिसर लाइन के बिल्कुल पास है जबकि दूसरी तरफ बालिका माध्यमिक विद्यालय और प्रारंभिक विद्यालय भवन बने हुए है। इसी के साथ गांव का आम रास्ता भी यही है जहां से ग्रामीणों का भी आना जाना रहता है। स्कूली बच्चे और ग्रामीण इसी रेलवे लाइन को लांघकर स्कूल पहुंचते है। दोनो विद्यालयों में करीब ६०० विद्यार्थी है जो रोजाना खतरे भरी डगर पार करने को मजबूर है।
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अंडर ब्रिज की मांग
ग्रामीणों द्धारा कई बार यहां अंडरब्रिज की मांग की गई ताकि ६ साल से १५ साल तक के बच्चे आसानी से स्कूल पहुंच सके। छोटे बच्चे रेल लाइन अकेले पार नहीं कर सकते है। इस लाइन पर दिन में टे्रनों के कई फेरे होते है। स्कूल की छुट्टि होने पर यहां पर एक साथ बच्चे टे्रक पार करते है एेसे में हर वक्त डर सताता है कि कभी कोई हादसा नहीं हो जाए। यह लाइन गांव के बीच से गुजरी हुई है जिससे पैदल राहगीर इस रास्ते का स्तेमाल कर ते है। महिलाएं और बुजुर्ग इस ट्रेक को आसानी से पार नहीं कर सकते क्योंकि ट्रेक उंचा है एेसे में अंडर ब्रिज की आवश्यकता है।





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