माउंट आबू (सिरोही). न चाय की थडिय़ां खुली और न ही दवाई की दुकानें खुली नजर आई। दूध-सब्जी बेचने वालों से लेकर निजी शिक्षण संस्थाएं भी बंद रही। कुछ ऐसा ही नजारा बुधवार को माउंट आबू में देखने को मिला। बिल्डिंग बायलॉज की शीघ्र स्वीकृति कराने मांग को लेकर आबू संघर्ष समिति के आह्वान पर माउंट आबू बंद सफल रहा। नक्की में नौकायन, दूध, सब्जी, दवाइयों की दुकान, रेस्तरां, खोमचे, चाय की थडिय़ां, बाबा गाडिय़ां, निजी शिक्षण संस्थाएं, सार्वजनिक उपयोग में लाए जाने वाले यात्री व भारवाहक वाहन तक बंद रहे। शहर समेत नगरपालिका क्षेत्र में आने वाले सभी बाहरी क्षेत्र ढुंढाई, तोरणा, देलवाड़ा, माचगांव, गोआगांव, हेटमजी, ओरिया ग्राम पंचायत के अधीन आने वाले ग्रामीण क्षेत्र, आरना, सालगांव, अचलगढ़, गुरु शिखर आदि भी बंद रहे।
लोगों ने स्वैच्छा से व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद कर समर्थन दिया। बंद समर्थकों की ओर से किचन गार्डन पार्किंग में जनसभा आयोजित की गई। इसके बाद शहर में मौन जुलूस निकालकर बायलॉज स्वीकृत कराने की मांग की गई।
पुलिस जाप्ता रहा तैनात
बंद के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने को पुलिस जाप्ता तैनात रहा। पुलिस उप अधीक्षक हीरालाल, थाना प्रभारी अचलसिंह देवड़ा, एसआई नारायणलाल, एसआईप्रभुराम, यातायात प्रभारी मूलदान चारण के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने शहर में गश्त की।
लगाए बैनर
बिल्डिंग बायलॉज स्वीकृति की मांग को लेकर बंद के चलते माउंट आबू आने वाले पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो उसके लिए तलहटी पर माउंट आबू बंद की सूचना के बैनर लगाए गए।
पर्यटक हुए परेशान
शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में सभी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां बंद रहने की वजह से पर्यटकों को अल्पहार से लेकर भोजन आदि प्राप्त करने को परेशानी का सामना करना पड़ा। मोरवी से आए पर्यटक दल प्रभारी हीरेन गांधी का कहना था कि वे पर्यटकों का दल लेकर मंगलवार शाम को माउंट आबू आए थे। उन्हें यहां बंद होने की जानकारी नहीं थी। जिससे सवेरे से ही उन्हें चाय व भोजन आदि को लेकर असुविधा का सामना करना पड़ा।
मानवता का पहलू
बिल्डिंग बायलॉज स्वीकृति की मांग को लेकर बंद से पूर्व माउंट आबू आए पर्यटक बुधवार सवेरे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत होटलों को चैकआउट कर बाहर बस स्टैण्ड पर आए। जहां रोडवेज की पहले से ही चल रही हड़ताल व सभी टैक्सी यूनियनों के बंद में शामिल होने से वे परेशान हो गए। जिस पर उपखंड अधिकारी निशांत जैन व बंद का आयोजन करने वाली आबू सघंर्ष समिति पदाधिकारियों की ओर से परेशान पर्यटकों को माउंट आबू से बाहर निकालकर आबूरोड तलहटी तक भेजने की व्यवस्था के लिए ब्रह्माकुमारी संगठन से सम्पर्क किया गया। मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए संस्थान के निजी वाहनों से बंद में फंसे पर्यटकों को तलहटी आबूरोड तक छुड़वाने की व्यवस्था की गई।
&बंद के दौरान पूर्णत: शांति रही। फिर भी एहतियात के तौर पर पुलिस मुस्तैद है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में निरंतर पैदल व वाहनों के जरिए गश्त की जा रही है।
हीरालाल, पुलिस उप अधीक्षक, माउंट आबू
&बंद शांतिपूर्वक पूर्णत: सफल रहा। तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को किचन गार्डन पार्किंग में एक आम जनसभा आयोजित की गई। इस अवसर पर शहर में मौन जुलूस निकालकर बायलॉज स्वीकृत कराने की मांग की गई।
सुनील आचार्य, अध्यक्ष, आबू संघर्ष समिति, माउंट आबू
आम सभा में आह्वान, दलगत राजनीति छोड़कर सभी एक मंच पर आएं
माउंट आबू. किचन गार्डन पार्किंग में आम सभा आयोजित की गई। इस मौके पूर्व उप मुख्य सचेतक रतन देवासी ने कहा कि लोगों को पर्यटन स्थल माउंट आबू के हित को देखते हुए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी मतभेदों को भूलाकर एक मंच पर आना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान सरकार बिल्डिंग बायलॉज स्वीकृत नहीं करती है तो कांग्रेस इस मुद्दे को अपने घोषणापत्र में शामिल करेगी। यदि कांग्रेस सरकार बनती है तो दो महीने के अंदर माउंट आबू के बिल्डिंग बायलॉज स्वीकृत किए जाएंगे।
आबू संघर्ष समिति अध्यक्ष सुनील आचार्य ने कहा कि एनजीटी के आदेशों की पालना, वन, पर्यावरण संरक्षण विभाग के निर्देेशों के तहत बायलॉज बनाकर नगरपालिका में आठ महीने पूर्व ही सक्षम स्वीकृति के लिए भेज दिया था। जिसके तहत गत 20 अगस्त को राज्य सरकार की ओर से गठित समिति ने पत्रावलियों का भौतिक सत्यापन कर उसकी अनुशंसा की। लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं दी गई। ऐसे में बंद का कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा।
इस मौके होटल एसोसिएशन अध्यक्ष कश्यप जानी, अजय बंसल, राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना अध्यक्ष महेंद्रसिंह परमार ने भी सम्बोधित किया। इस मौके भंवरसिंह मेड़तिया, प्रशांत राका, प्रमोद व्यास, टेकचंद भंभाणी, मोहनलाल हीरागर, हरीनारायण आदिवाल, यूसुफ खान, देवेंद्र अलिका, भारतसिंह राठौड़, नारायणसिंह भाटी, प्रवीणसिंह परमार, प्रवीण अलिका समेत कई लोग मौजूद थे।
पार्षद बोले- त्याग पत्र देने का तैयार
पार्षद भरत लालवानी, भगवानाराम ने कहा कि माउंट आबू की जनता ने अपनी समस्याओं के समाधान की आस को लेकर उन्हें चुनकर पालिका बोर्ड में भेजा था। यदि उनकी भवन निर्माण समस्या का समाधान के लिए बिल्डिंग बायलॉज स्वीकृत नहीं होते हैं तो पार्षद सामूहिक रूप से त्यागपत्र देने के लिए तैयार हैं।





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