अलवर. राजस्थान पत्रिका की ओर से विधानसभा चुनावों में अलवर जिले के एजेंडे पर संवाद कार्यक्रम हुआ। संवाद कार्यक्रम में शिक्षा व प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों ने उपयोगी सुझाव दिए। इस संवाद में सबसे बड़ी यह बात सबने मानी कि विकसित देशों की तुलना में प्रदेश के बजट का मात्र 0.3 प्रतिशत ही विज्ञान और तकनीकी विकास पर दिया जा रहा है, जबकि विकसित देशों में यह कुल बजट का 4 प्रतिशत तक होता है इससे इस क्षेत्र में नवाचार ही थम गया है।
राजस्थान पत्रिका की ओर से मॉडर्न इंस्टीटयूट ऑफ टैक्नोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर में जन एजेंडे की बैठक में यह बात सामने आई।
यह सुझाव शिक्षाविद् शुभम सक्सेना ने रखा। शिक्षाविद् सत्येन्द्र कुमार शर्मा का कहना था कि पत्रिका की यह सराहनीय पहल है जब वे सभी विधानसभा क्षेत्रों में जाकर जन एजेंडा तैयार कर रहे हैं।
इस बैठक में विकास कुमारी ने कहा कि विकास के लिए आवश्यक है कि स्वच्छता पर भी ध्यान दिया जाए। सरकार की योजनाएं तो बहुत हैं लेकिन वे समय पर क्रियान्वित नहीं हो पाती हैं। अर्चना ओझा का कहना था कि सरकार को चुनावों के समय ही नई योजनाएं याद आती हैं। अलवर जिले में अब भी स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। इसमें छवि नागपाल ने कहा कि युवाओं को सही अर्थों में स्टार्टअप से जोडऩा होगा। इसमें विकास महलावत का कहना था कि अलवर जिले में सबसे बड़ी आवश्यकता तो मेडिकल कॉलेज की है। यह चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाने चाहिए। बैठक में नितिन जायसवाल का कहना है कि अलवर के युवाओं में तकनीकी दक्षता का विकास करना होगा। प्रोफेसर डॉ.रईस मुहम्मद ने कहा कि जब तक स्कूली शिक्षा का विकास नहीं होगा तब तक किसी सकारात्मक परिणाम की संभावना कम है। पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए प्रयास करने होंगे।
इन्होंने भी दी अपनी राय
मनीष मुखीजा, सतपात सिंह कुशवाह, राजीव कुमार, राजीव कुमार, अरविन्द शर्मा, आदित्य नारायण, अमित कुमार सिंह, प्रेम कांत, रंजन पटेल, अतुल देशमुख, आलोक कुमार, प्रवीण, नरेश अग्रवाल, वैशाली गुप्ता, अर्चना ओझा, अर्पणा श्रीवास्तव, दीपक शर्मा, मीनाक्षी बिंदल, स्वीटी दूबे, भुवन गुप्ता, नीरज जैन आदि थे।





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