अजमेर.
राजस्थान लोक सेवा आयोग ने आरएएस प्रारंभिक परीक्षा-2018 के परिणाम में 15 गुना अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण करने के मामले को सर्वाधिक तवज्जो दी। कार्मिक विभाग के जवाब और तकनीकी परीक्षण के चलते ही परिणाम 78 दिन बाद जारी हो पाया है।
आयोग ने 5 अगस्त को आरएएस प्रारंभिक परीक्षा-2018 कराई थी। आयोग ने परिणाम तैयार करने से पहले 15 गुना अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण करने के मामले में कार्मिक विभाग से तकनीकी राय मांगी थी। वहां से प्रत्युत्तर मिलने के बाद आयोग ने इसका तकनीकी परीक्षण किया।
खुद आयोग अध्यक्ष दीपक उप्रेती ने कई बिन्दुओं पर गहन परीक्षण, वर्गवार आरक्षण और अन्य तकनीकी पहलुओं का अध्ययन कराया। इसके पश्चात 23 अक्टूबर को देर रात 1 बजे नतीजा जारी किया गया।
2016 के परिणाम से जागा आयोग
राजस्थान प्रशासनिक एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती-2016 में प्री-परीक्षा स्तर पर 15 गुना से अधिक सफल अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा से बाहर रखने पर राजस्थान हाइकोर्ट में याचिका लगाई गई। अदालत ने आदेश में कहा कि चयन प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर आरक्षण का प्रावधान लागू नहीं किया जा सकता है।
खंडपीठ ने आदेश दिया कि आरएएस भर्ती नियमों के तहत 15 गुना अभ्यर्थी ही मुख्य परीक्षा के लिए बुलाए जाएं। प्रारंभिक परीक्षा के लिए परिणाम के स्तर पर 15 गुना से अधिक सफल घोषित अभ्यर्थियों की अलग सूची बनाई जाए।
इनमें से चयन के लिए सफल होने वालों को नियुक्ति नहीं दी जाए। इस मामले में आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका भी दायर की। 2016 के परिणाम को देखते हुए आयोग ने आरएएस भर्ती परीक्षा-2018 में इस तथ्य को खास ध्यान में रखा।
कार्मिक विभाग से वर्गवार 15 गुना अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण करने के जवाब का गहन तकनीकी परीक्षण कराया गया। प्रत्येक स्तर पर अति सूक्ष्मता से जांच की गई। इसके बाद ही आरएएस 2018 प्रारंभिक का नतीजा जारी किया गया, ताकि भर्ती में कोई अड़चन नहीं आए।
-दीपक उप्रेती, अध्यक्ष आरपीएससी





No comments:
Post a Comment