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तब राजसमंद विधानसभा सहित 26 सीटों पर चुने गए थे दो दो विधायक

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

वर्तमान में हर विधानसभा से एक-एक विधायक चुना जाता है, लेकिन 1952 में हुए पहली बार विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर दो दो विधायक चुने गए थे। यह रोचक इतिहास है कि राजसमंद विधानसभा के साथ उदयपुर जिले की सराड़ा व फलासिया सहित प्रदेश की 26 सीटें ऐसी थी, जहां से दो-दो विधायक बने थे। इसमें विधायक आरक्षित वर्ग और दूसरा सामान्य वर्ग से था। राजस्थान गठन के दौरान 1952 में राजसमंद विधानसभा का क्षेत्रफल चारभुजा, राजसमंद, रेलमगरा व मावली तक फैला हुआ था। तब चुनाव के दौरान अनुसूचित जाति वर्ग से अमृतलाल यादव एवं सामान्य वर्ग से केलवा के भैरूसिंह राठौड़ राजसमंद विधायक चुने गए थे। दोनों विधायकों ने राजसमंद विधानसभा क्षेत्र के समग्र विकास को लेकर कई योजनाएं बनवाई। साथ ही क्षेत्रीय लोगों की जनसमस्याओं के निस्तारण के लिए शहर से लेकर गांवों के चबुतरे पर बैठक कर लोगों की समस्या सुनते थे। भैरूसिंह राठौड़ केलवा ठिकाने से है और मौजूदा सांसद हरिओमसिंह राठौड़ भी उन्हीं के परिवार से जुड़े हैं।

गांवों में करते थे रात्रि विश्राम
रेलमगरा के शांतिलाल टुकल्या ने बताया कि पहली विधानसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशी जनसंपर्क करते हुए जिस कस्बे, गांव ढाणी में पहुंचते थे, उसी गांव में रात्रि विश्राम कर लेते थे। तब न तो वाहनों का शोर था और न ही दिखावटी वादों के पम्पलेट, बैनर-पोस्टर। इस तरह उनके जेहन में ऊंच-नीच, अमीर-गरीब का भेदभाव भी नहीं था, तभी तो जहां भूख लग जाती, उसी वोटर के घर खाना खा लेते और किस भी वोटर के घर रात्रि विश्राम करने से गुरेज नहीं करते।

तब कौडिय़ों का खर्च, अब करोड़ों में
कांकरोली के भगवत शर्मा ने बताया कि 196 0-70 के दशक में विधानसभा चुनाव मामूली कौडिय़ों में हो जाते थे, मगर आज का खर्च करोड़ों तक पहुंचता है। तब गांव का चबुतरा या चारपाई ही सभा का मंच बन जाता था, मगर आज लाइट-डेकोरेशन का बड़ा खर्च है। तब प्रत्याशी भी जमीन पर बैठ जाते थे, मगर आज सभा में आमजन के लिए भी कुर्सियां लगाने का ट्रेंड है।

इन सीटों पर चुने थे दो-दो विधायक
डूंगरपुर, करणपुर (श्रीगंगानगर), चूरू, झुंझुनूं, खेतरी (झुंझुनूं), लक्ष्मणगढ़ (सीकर), सीकर, फागी (जयपुर), लालसोट (जयपुर), राजगढ़ (अलवर), वैर (भरतपुर), बयाना (भरतपुर), बारी (धोलपुर), हिंडौन (सवाई माधोपुर), टोंक, कोटा, पीपालदा (कोटा), झालरापाटन (झालावाड़), बड़ी सादड़ी (चित्तौडग़ढ़), प्रतापगढ़ (चित्तौडग़ढ़), सराड़ा (उदयपुर), फलासिया (उदयपुर), जैतारण (पाली), बाली (पाली), सिरोही व परबतसर (नागौर)।

दो कांग्रेस प्रत्याशियों में ही मुकाबला
राजसमंद विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 1962 के चुनाव में कांग्रेस के दो प्रत्याशियों के बीच मुकाबला हुआ था। तब इस विधानसभा को खुली सीट के रूप में घोषित किया था। इसी वजह से एक ही पार्टी के दो प्रत्याशी के बीच चुनाव हुए। इसमें निरंजनाथ आचार्य ने 10 हजार मतों से रोशनलाल बोला को हराया था।



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