Breaking News
recent

निकाली रजत कलश यात्रा, समझाया आगम का महत्व



चित्तौडग़ढ़. जैन साध्वी चारुप्रज्ञा, जयप्रज्ञाजी एवं हेमप्रज्ञा के सानिध्य में सैंती में चल रहे वर्षावास काल के दौरान सोमवार को श्रमण संघ के पूर्व आचार्य देवेन्द्रमुनि का जयंती समारोह मनाया गया। सेंती के महावीर प्रवचन हॉल में धर्मसभा में साध्वी चारूप्रज्ञा ने कहा कि जैन आगम में धनतेरस को धन्य तेरस या ध्यान तेरस भी कहते हैं। भगवान महावीर इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गए थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुए। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ। धनतेरस के अवसर पर महामंगलकारी पेसठीया यंत्र अनुष्ठान का आयोजन सम्पन्न् हुआ । इससे पुर्व 21 दिवसीय श्रृतज्ञान गंगा महोत्सव के तहत भगवान महावीर के निर्वाण कल्याणक को लेकर प्रभु की अंतिम वाणी उत्तराध्ययन सुत्र का वाचन साध्वी जयप्रज्ञाजी ने किया। उन्होंने श्रमण भगवान महावीर स्वामी की अंतिम वाणी उत्तराध्ययन सुत्र के अध्ययन का मुल पाठ अर्थ एवं विवेचन किया एव महावीर कथा का वाचन भी किया। इससे पूर्व अभिमंत्रित रजत कलश यात्रा का आयोजन भी हुआ। रजत कलश यात्रा सुबह ७.३० बजे दिवाकर भवन से प्रारंभ हुई। साध्वीगण, श्रावक संघ एवं महिला मण्डल के साथ सेंती संघ चित्तौडगढ के कोषाध्यक्ष छितरमलजी चण्डालिया के यहां सम्पन्न् हुई। यहां संघ पुजा धर्म प्रभावना के पश्चात महावीर प्रवचन हाँल मे अनुष्ठान आयोजन सम्पन्न हुआ।
तेले की कडी मे लक्ष्मीबाई बाबेल ने प्रत्याख्यान ग्रहण किए। धर्म प्रभावना सुरेशकुमार मनिषकुमार सिघंवी परिवार की ओर से वितरित की गई। धर्म सभा का संचालन ऋषभ सुराणा ने किया। प्रवचन मे विशेष 11 लक्की ड्रा के लाभार्थी जोधसिंह, कांतादेवी मारु एवं मनोहरलाल रमेशचन्द्र माण्डावत परिवार रहे। सामूहिक तेला एवं सामूहिक बेला तप की आराधना भी की जा रही है। संघ प्रवक्ता के अनुसार मंगलवार का जाप राजेन्द्र जी, चंद्रेश, सुनील दोशी के सेती मैन रोड स्थित निवास पर रखा गया है।

 

 



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.