जयप्रकाश सिंह. भीलवाड़ा।
उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही शहरी इलाकों में भले ही चुनावी गरमाहट बढ़ गई, लेकिन गांवों में अभी माहौल ठंडा ही है। चुनावी अटकलों और चर्चा के बजाय धरतीपुत्र खेती-बाड़ी में व्यस्त हैं। किसको टिकट मिला, किसका कटा, इसके बजाय उसे चिंता इस बात की है कि खेत में जल्दी बुआई पूरी हो। किसान कहीं रेलणी तो, कहीं खेतों में उगी फसल की पिलाई के काम में व्यस्त हैं।
झाफरपुरा: अभी चुनाव नहीं फसल की चिंता
मांडलगढ़ के समीप झाफरपुरा में पहाडि़यों के बीच खेती में अपने परिजनों के साथ जुटे प्रभुलाल साहू का कहना था कि अभी चुनाव की चिंता नहीं है। हमें तो फसलों को जंगली जानवरों से बचाने की ज्यादा चिंता है। रात को परिजनों के साथ खेत की रखवाली करनी पड़ती है। जानवरों के भय से पेड़ की डाल पर पलंग बना रखा है।
सवाईपुर: चुनावी माहौल ठंडा, नामांकन प्रक्रिया के बाद तस्वीर साफ होने का इंतजार
जिले के कई गांवों का जब जायजा लिया, तो वहां चुनावी माहौल नजर नहीं आया। सवाईपुर में चाय की दुकान पर बैठे कुछ किसानों का कहना था कि अभी तो सारा ध्यान खेतों पर है। खेतों से कपास की फसल घर आई है। अभी आधा से ज्यादा कपास नहीं निकल पाया है। गेहूं व चने की बुआई चल रही है। कुछ जगह सरसों की फसल बड़ी होने लगी है। पानी पिलाने के साथ ही निराई-गुराई का कार्य चल रहा है। चुनावी चर्चा करने पर कहते हैं कि अभी माहौल ठंडा है। अब उम्मीदवारों की घोषणा हुई है। बगावत के सुर उठ रहे हैं, नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी।
महंगाई व स्थानीय मुद्दे
मुद्दों के बारे में पूछने पर ग्रामीणों ने कहा, महंगाई, पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों के साथ स्थानीय मुद्दे भी हावी रहेंगे। इसके अलावा किसानों और मजदूरों से जुड़ी समस्याओं के साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कों से होने वाली परेशानी भी छलक पड़ी। जातिगत समीकरण के साथ उम्मीदवार भी देखा जाएगा। ढोकलिया गांव में कपास की खेत में काम रहे किसान प्रभुलाल मीणा ने कहा, अभी खेती-बाड़ी में व्यस्त हंू। सात दिसम्बर को मतदान करने जरूर जाऊंगा।
बीगोद: कुछ खास नहीं कर पाए जनप्रतिनिधि
बीगोद कस्बे में मुख्य सड़क के दोनों तरफ लोहे के सामान की दुकानें और कारखाने हैं। यहां लोगों ने दुकानों पर बैठकर चुनावी चर्चा शुरू कर दी है। यहां बैठे भवानीशंकर प्रजापत, गुलाम नबी शाह और हर्षवर्धन खटीक का कहना था कि कांग्रेस ने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है, अब भाजपा के उम्मीदवार का इंतजार है। उसके बाद ही माहौल बन पाएगा। हालांकि दस माह पहले यहां उप चुनाव हो चुका है, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि कुछ खास नहीं कर पाए। भाजपा के उम्मीदवार के नाम लेकर कई तरह के कयास लग रहे हैं। अन्य सीटों पर भी उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद उनकी हार-जीत को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
खाद-बीज की नहीं मारामारी
इस बार गांवों में खाद-बीज की मारामाारी नहीं है। इसे चुनावी साल का असर माना जा रहा है। जगह-जगह सहकारी समितियों के पास खाद का बम्पर स्टॉक पड़ा है। जानकारों के अनुसार सरकार के इशारे पर बिना पैसा जमा कराए ही निर्माता कम्पनियों ने बुआई से पहले ही सहकारी समितियों को खाद की जमकर आपूर्ति कर दी। सहकारी संस्थाओं के साथ निजी प्रतिष्ठानों पर भी किसानों को आसानी से खाद बीज मिल रहा। ऐसे में किसान को खाद-बीज की चिंता नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि मतदान के अंतिम दिनों में किसान खेती-बाड़ी के काम से फ्री होकर पूरी तरह से चुनाव में जुट जाएगा।





No comments:
Post a Comment