उदयपुर . केंद्रीय कारागृह से बरामद तीन सिम व दो मोबाइल के मामले ने शुक्रवार को उस समय नया मोड़ ले लिया, जब पुलिस अनुसंधान में सामने आया कि आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी को अस्थायी सफाई कर्मचारी ने संबंधित सिम बिना किसी स्वार्थ के केवल दोस्ती में पहुंचाई थी। कारागृह की सुरक्षा में सेंध के गंभीर मामले में पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट के जरिए गिरफ्तार आजीवन कारावास के कैदी निम्बाहेड़ा निवासी गणपतलाल पुत्र भंवरलाल को अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश हुए। हाथीपोल थाने के अनुसंधान अधिकारी हैड कांस्टेबल तेजसिंह ने बताया कि बरामद हुई तीन में से एक सिम आरोपी गणपतलाल के नाम पर थी। इसलिए उसे गिरफ्तार कर उससे मामले में पूछताछ की गई। पुलिस मामले में और किसी सुराग के हाथ लगने से इनकार कर रही है।
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यह था मामला
करीब तीन माह पूर्व केंद्रीय कारागृह के उपअधीक्षक ने परिसर में बंदी विजय पुत्र बख्ताराम के कब्जे से तीन सिम व दो मोबाइल बरामद करने की रिपोर्ट हाथीपोल थाना पुलिस को दी थी। पुलिस पड़ताल में आया कि बरामद सिम निंबाहेड़ा निवासी गणपतलाल, पटेल सर्किल निवासी शबनम बानो उर्फ शबनम तथा कनेरा थाना जिला चित्तौडगढ़़ निवासी किशन के नाम पर है। पुलिस ने मामले में सबसे पहले शबनम को गिरफ्तार किया था। गणपतलाल के बाद किशन की गिरफ्तारी से पुलिस को कुछ खास सुराग हाथ लगने की उम्मीद है।
कौन था वो सफाई कर्मचारी
अब पुलिस के लिए उस सफाई कर्मचारी को तलाशना मुश्किल बन गई है, जिसने केंद्रीय कारागृह में सेवाएं देते हुए व्यवहार में कैदी तक सिम पहुंचाई थी। वजह साफ है कि सफाई कर्मचारी अस्थायी था, जो निजी एजेंसी के माध्यम से कारागृह में सेवाएं दे रहा था। अब उसके अते-पते नहीं हैं। पुलिस मामले में सेवा प्रदाता एजेंसी के खिलाफ अब तक नरमी बरत रही है। कायदे से तो जेल तक पहुंच रखने वाली एजेंसी को ऐसे कार्मिकों का भी नियमित रजिस्टर मेंटेन करना चाहिए।





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