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पचपदरा विधानसभा सीट: मतदाताओं के लिए जले पर नमक है रिफाइनरी का मुद्दा

रतन दवे/पचपदरा। रिफाइनरी की दीवारें ऊंची हो रही हैं, लेकिन जमीन के दाम धरातल पर है। चुनाव में यह बड़ा मुद्दा है। कांग्रेस-भाजपा दोनों भुना रही है, लेकिन यहां के लोग इस पर जले भुने है। लोगों का कहना है कि दूध के जले है, अब तो फूंक-फूंक कर कदम रखेंगे। अब तो सब कुछ जोधपुर जा रहा है, हमारे पास तो रिफाइनरी रही है। जमीन के भाव आए तो कुछ कमा लेंगे वरना अभी तक तो गंवाया ही है।

सूना पड़ा पचपदरा का बस स्टेंड दर्शा रहा है कि रिफाइनरी का पहले वाला बूम यहां नहीं है। थोब, नेवरी और कल्याणपुर तक के गांवों में पानी की पीड़ा हर जगह है। खारा पानी और वो भी बीस दिन में एक बार। विधायक मंत्री बन गए, लेकिन पानी की पीड़ा हल नहीं कर पाए, कल्याणपुर से जोधपुर तक हाईवे बनने से लोग खुश है।

कल्याणपुर में हाईवे पर बना पुल को देखने से शानदार लगता है लेकिन दुकानदारों की पीड़ा है कि व्यापार पर असर हुआ है। कल्याणपुर में बालिकाओं के लिए आठवीं तक का स्कूल ही है। बड़े कस्बे में अब पंचायत समिति और उप तहसील हो गई लेकिन दसवीं-बारहवीं स्तर का बालिका स्कूल नहीं होने का मलाल यहां के लोगों को है। पचपदरा के सरपंच विजयसिंह खारवाल को जरूर उम्मीद है कि अब रिफाइनरी बनेगी तो कस्बे की तस्वीर बदलेगी।

मकान पर कालिख है तो आंतों मेें...
करीब एक लाख की आबादी की बालोतरा नगर परिषद जोधपुर संभाग की सबसे धनाढ्य नगर परिषद मानी जाती है। यहां कारखानों से मिलने वाला टैक्स नगर परिषद का कोष भरता है लेकिन लोग मूलभूत सुविधाओं की कमी से परेशान है। सीवरेज सिस्टम सही नहीं, गलियों में अतिक्रमण है।

कांग्रेस का बोर्ड है और भाजपा के मंत्री। पटरी नहीं बैठने की पीड़ा शहर भुगत रहा है। कारखानों का दूषित पानी नदी में छोडऩे से लूणी नदी खराब हो रही है और लोगों की सांसों में प्रदूषण घुल रहा है। ओद्यौगिक क्षेत्र के आसपास के मकानों की सफेद पुताई पर कालिख जमी साफ नजर आती है। प्रदूषण के कारण लोगों का जीना मुहाल है।

अस्पताल...श्यामप्यारी को यों रैफर करता है
अस्पताल पहुंचे तो यहां श्यामप्यारी को रैफर किया जा रहा था। बताया कि हार्ट की समस्या है। परिवार रुपयों के इंतजाम व एंबुलेंस लाने में हांफ रहा था। सुविधाएं की कमी रैफर की वजह बताइ। परिजनों ने नंबर ले लिए।

जोधपुर पहुंचकर बात की तो बताया कि टेस्ट करवा लिए, केवल गैस थी। केवल गैस थी तो रैफर की नौबत क्यों? इस पर अस्पताल से पता किया तो बताया कि प्रतिदिन एक दर्जन से अधिक लोग रैफर होते हंै। लोगों ने दबी जुबान बताया कि अस्पताल स्टाफ की एंबुुलेंस है इसलिए....। अस्पताल में 150 बैड हंै। आधे चिकित्सकों के पद खाली है, ट्रोमा सेंटर भी नहीं है।

लूणीकंठा प्यासा... वादा ही रही योजनाएं
बिठूजा, खेड़, जसोल, नाकोड़ा, तिलवाड़ा, बागुण्डी सहित पूरा क्षेत्र में लूणी नदी बहती थी। निर्बाध अजमेर से आने वाली इस नदी के तीन-चार साल में एक बार आने पर ही पूरा क्षेत्र मीठे पानी की आस पूरी करता और फिर जमीन रिचार्ज होने से कुओं में पानी। हरे-भरे खेत और बगीचे लगे थे, अब सब कुछ उजड़ा है।

प्रदूषण व अतिक्रमण नदी को लील गए। पाताल बैठे पानी के कारण सरकारी आपूर्ति का भरेासा है। नहरी पेयजल योजनाएं केवल चुनावी वादों तक सिमटी है। तिलवाड़ा के बुजुर्गों का कहना है उनके इस जन्म में तो पानी आता नहीं दिख रहा। पूरे क्षेत्र में यही पीड़ा है।

लोगों के बीच रहे
मंत्री बनने के बावजूद अमराराम चौधरी लोगों से जुड़े रहे। प्रतिद्वन्द्वी मदन प्रजापत ने विपक्ष की भूमिका बखूबी निभाई। नगर परिषद चुनावों में कांग्रेस का बोर्ड, प्रधान की कुर्सी को लेकर पूरी उठापटक और रिफाइनरी की बड़ी सभा ने चर्चित रखा।

गांव और शहर दोनों में एक हाल
गांवों में ग्राम पंचायत और शहर में नगर परिषद का बजट भी मूलभूत सुविधा केंद्रित रहा है। चुनाव के बाद भी लोग वोट के गणित के हिसाब से बंटे है। जहां ज्यादा वोट मिले वो खास है और जहां कम मिले वहां काम भी कम हुआ।

महिलाओं और युवाओं के मुद्दे
पचपदरा क्षेत्र में महिला चिकित्सकों की कमी के कारण महिलाओं को उपचार के लिए निजी अस्पताल या जोधपुर रेफर करना पड़ा। महिला कॉलेज में व्याख्याताओं की कमी हमेशा खली लेकिन समाधान नहीं हो पाया। युवाओं को कॉलेज में व्याख्याता व अतिरिक्त विषय की जरूरत रही।


सबसे बड़ा मुद्दा बालोतरा बने जिला
बालोतरा को जिला बनाना सबसे बड़ी मांग थी। खुद राजस्व मंत्री रहने के बावजूद अमराराम चौधरी केवल भरोसा देते रहे कि सरकार आज घोषणा करेगी, कल हो जाएगी लेकिन पूरा कार्यकाल निकल गया। रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण भी बालोतरा नहीं हो सका। मीठे पानी की समस्या से भी क्षेत्र के लोग जूझ रहे है।

क्षेत्र की प्रमुख समस्याएं
पेयजल समस्या
खारे पानी की आपूर्ति
प्रदूषण से लूनी नदी खराब
बालोतरा नगरपरिषद में सिवरेज का कार्य अधूरा
बालोतरा शहर में ओवरब्रिज का निर्माण नहीं
चिकित्सकों के पचास प्रतिशत पद खाली


2013 का चुनाव परिणाम
नाम------------ पार्टी------------प्रतिशत
अमराराम चौधरी----भाजपा----------55.95
मदन प्रजापत------कांग्रेस-----------39.17
रामसिंह------------बसपा----------1.11
खरथाराम------------जेजीपी-------0.16
तेजाराम देवासी-------एनपीपी-------0.14


विधायक निधि में खर्च
वर्ष --------------बजट व्यय-------कार्य
2014-15-------190.69------------66
2015-16-------178.48------------53
2016-17-------232.33------------49
2017-18-------235.66------------48
2018-19-------263.85------------61



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