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छह सीटों पर चुनाव लेकिन हर जगह चर्चा सिर्फ दो की, क्या होगा लाडपुरा और उत्तर में...

कोटा. पूरा कोटा शहर इन दिनों चुनावी माहौल में रंगा है। वैसे जिले में 6 विधानसभा क्षेत्र हैं और सभी पर प्रत्याशी प्रचार की मशक्कत में जुटे हैं। चुनाव प्रक्रिया स्वभाविक रूप से चल रही है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा लाडपुरा और कोटा उत्तर की हो रही है। दोनों सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला होने की चर्चा है। दोनों दलों की ओर से चल रहे सियासी ड्रामे को लेकर शहर के विभिन्न ठिकानों पर नेताओं के लिए सलाह भी तो गुस्सा भी जाहिर हो रहा है। यह भी चर्चा है कि जब नेता रातों रात दल बदल लेते हैं तो वे फिर कार्यकर्ताओं को पार्टी के प्रति निष्ठावान होने का पाठ क्यों पढ़ाते हैं। अपराधियों और अतिक्रमण को संरक्षण देने वाले नेताओं के बारे में चर्चा हो रही है।

 

रेलवे मजदूर संघ

शाम 4 बजे

रेलवे मजदूर संघ कार्यालय के बरामदे में दिनभर लोग आते-जाते रहते हैं। इस बीच चुनावी चर्चा भी होती है। जो भी आता है, वह यही पूछता है कि कोटा उत्तर में क्या होने जा रहा है। कोटा उत्तर की बात खत्म होते ही लाडपुरा की चर्चा शुरू हो जाती है। नेताओं की कार्यशैली और जनसम्पर्क के तरीके पर भी चर्चा होती है।

महिलाओं के मुकाबले की चर्चा

यहां चर्चा में मशगूल संजय, अंकुश और अन्य साथी इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि इस बार लाडपुरा में विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस ने महिलाओं को मौका दिया है। इस बार महिला प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर है। लाडपुरा की बात चल ही रही थी तभी उनमें से एक ने कहा, अरे लाडपुरा का तो सबको पता है क्या होने वाला है, पर कोटा उत्तर में क्या चल रहा है। यहां विकास कार्यों के अलावा प्रत्याशियों की छवि को आधार बनाकर भी जनता मतदान करेगी।

छावनी
शाम 5.30 बजे

यहां सुबह-शाम चुनावी चर्चा के अलावा किसी दूसरे मुद्दे पर बातचीत नहीं होती है। चुनावी समीकरणों को लेकर यहां बहस होना आम बात है।

यहां बैठे सत्यनारायण गुप्ता, सुरेश, मेहताब व चार-पांच मित्र इस बात पर चर्चा करते नजर आए कि लाडपुरा और कोटा उत्तर में मुकाबला किसके लिए ज्यादा मुश्किल है। इसी बीच पैराशूट प्रत्याशियों के मुद्दे पर बात चल पड़ी। इसी बीच दूसरे साथी ने कहा, टिकट मिलने और नामांकन दाखिल करने के बाद पैराशूट का मुद्दा कुछ ही दिन में गायब हो जाता है और पार्टी के कार्यकर्ताओं को पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन आना पड़ता है। ऐसे में यह बात ज्यादा महत्वपूर्ण है कि अपराधियों को संरक्षण देने वाले नेताओं से परेशान जनता चुनाव के समय में क्या उन्हें जमीन दिखाती है या फिर दुबारा मौका देती है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि पांच साल में एक बार मौका आता है, जब मतदाता सही व्यक्ति का चुनाव कर सकता है।

बसंत विहार
रात 8 बजे

बसंत विहार में तांत्या टोपे पार्क के पास दिनभर चुनावी चर्चाएं होती रहती हैं। यहां के रहवासी नेताओं के बनते बिगड़ते समीकरणों और उनकी ताकत पर बात करते हैं। यह क्षेत्र कोटा दक्षिण विधानसभा में आता है। लोगों का कहना है कि कोटा की हर सीट पर समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

जनता की सही मायने में हो सुनवाई

यहां बैठे लोगों में ज्यादातर कोटा उत्तर और लाडपुरा में हो रहे मुकाबले की चर्चा कर रहे थे, कोई कांटे की टक्कर बता रहा था तो कोई दल विशेष को ज्यादा ताकतवर या कमजोर बता रहा था। कई लोग नेताओं की कार्यशैली पर भी चर्चा करते नजर आए। यहां हरीश पांचाल, नवीन शर्मा, मुकेश, अशोक मीना और भरत पारेता चुनावी चर्चा में व्यस्त थे। उनकी बातचीत में उन्होंने कोटा उत्तर में जातीय समीकरणों को हवाला देते हुए कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशी के मजबूत और कमजोर पक्ष पर चर्चा के साथ प्रत्याशियों की छवि को लेकर भी चर्चा हो रही थी।

 

नयापुरा बग्गीखाना

6.30 बजे

यहां महिलाएं एक समूह में बैठकर यह चर्चा कर रही थी कि हर रोज कोई न कोई वोट मांगने आता है। जिस तरह वे सेवा की बात करते हैं, वह पिछले पांच साल में कहीं दिखाई नहीं दी। चुनाव आते ही सभी के सुर बदल गए। जो वोट मांगने आता है वह बात तो ऐसे कर रहा जैसे सगे बेटे से भी ज्यादा ध्यान रखेगा।

चुनावी चर्चाओं ने शॉल ओढ़ी

यहां बैठी महिलाएं स्थानीय बोली में चर्चा कर रही थी। इस चर्चा में महंगाई केन्द्र बिंदु रही। संतोष व विमल बाई ने कहा, अबकी बार तो महंगाई ने कमर ही तोड़ द्यी। गैस सिलण्डर रो भाव अतनो बढ़ ग्यो, नयापुरा मं सड़का री हालत खराब हो रह्यी छ। मोहर की प लगाणी छ: या तो देखणी पडग़ी। चबूतरे पर कुनकुनी धूप हो या ठंड भरी शाम महिलाओं के बीच चुनावी चर्चा की गर्माहट देखी जा सकती है। कोटा उत्तर विधानसभा सीट को लेकर महिलाओं का कहना है कि यहां दोनों प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला है। लेकिन जो वादा करके मुकरे उन्हें वोट नहीं दिया जाएगा। कल्पना कहती हैं, इस बार कोई बदलाव की लहर बहेगी मंहगाई से सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाएं होती है।



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