जैसलमेर. जैसलमेर पर्यटन को इस बार महाराष्ट्र राज्य के सैलानियों का बड़ा सहारा मिला है। दिवाली सीजन पर हर बार की भांति पड़ोसी गुजरात से हजारों सैलानी उमड़े, उनका आगमन दिवाली के बाद पांच दिनों यानी लाभपंचमी तक रहा। इसके पश्चात देशी पर्यटकों का जो भीड़-भड़ाका जैसलमेर में नजर आया, उसमें बड़ी भागीदारी दूरस्थ प्रांत महाराष्ट्र से आए मेहमानों की रही। महाराष्ट्र के मुम्बई, ठाणे, नासिक, पुणे, कोल्हापुर, नागपुर, औरंगाबाद आदि शहरों से इस बार बड़ी तादाद में सैलानी सपरिवार भारत की पश्चिमी सीमा के आखिरी छोर पर अवस्थित जैसलमेर में घूमने आए। बताया जाता है कि वहां की कई स्कूलों में दिवाली का अवकाष 19 नवम्बर तक होता है। इससे लोगों में बच्चों को लेकर घूमने आने के प्रति अच्छा रुझान देखा गया।
जुड़ गया नया अभिवादन
जैसलमेर के पर्यटन से जुड़े लोगों के बीच इस बार महाराष्ट्रीयन सैलानियों की बड़ी तादाद में पहुंचने के कारण एक नया अभिवादन ‘जय महाराष्ट्र’ जुड़ गया।अब तक वे लोग बंगाली सैलानियों को ‘ओमार बांग्ला’ और गुजरातियों के लिए ‘कैम छो, मजा मा’की कैच लाइन का ही इस्तेमाल कर रहे थे। दिवाली के पांच दिनों बाद जहां अधिकांष गुजराती सैलानी स्वर्णनगरी से विदा ले गए, तब से यहां के वातावरण में मराठी भाषा घुल गई।महाराष्ट्र के सैलानी इतनी बड़ी संख्या में पहली बार जैसलमेर आए। इसमें मुम्बई और अहमदाबाद से जैसलमेर के लिए सीधी हवाई सेवा की उपलब्धता की अच्छी भूमिका मानी जा रही है।इसके अलावा निजी वाहनों से भी वहां के सैलानी यहां पहुंचे और पार्किंग स्थलों पर ‘जीजे’ पासिंग के साथ ‘एमएच’पासिंग नम्बर वाली गाडिय़ों की बहुतायत नजर आई।
अन्य प्रांतों से आवक भी
वर्तमान समय में जैसलमेर भ्रमण के लिए पहुंचने वाले देशी सैलानियों में उत्तर प्रदेष, मध्यप्रदेष, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा के साथ ही दूर-दराज के पूर्वी व दक्षिणी राज्यों के लोग भी आ रहे हैं। दिवाली से करीब 3-4 दिन पहले शुरू होकर अब तक के एक पखवाड़े में 40 हजार तक सैलानी जैसलमेर आ चुके हैं। इस अवधि में विदेशी पर्यटक भी कम नहीं आए। उनकी संख्या 10 हजार तक आंकी जा रही है। विदेशियों में ज्यादातर मेहमान फ्रांस, इटली, स्पेन, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका से आ रहे हैं।
लुभा रहे सोनार और सम
देशी सैलानियों का विशेष जमघट सुबह जैसलमेर के विष्व प्रसिद्ध सोनार दुर्ग और षाम के समय सम सेंड ड्यून्स पर लगता है। सम स्थित रिसोट्र्स में दिवाली सीजन के दौरान अधिकतर टेंट्स व कॉटेज हाउसफुल रहे। वर्तमान में भी वहां के 60 प्रतिशत ठहरने के ठिकानों में सैलानी रहते हैं। जैसलमेर की होटलों में भी कमोबेश यही स्थिति रही।
फैक्ट फाइल -
-06 लाख से ज्यादा सैलानी आते हैं हर साल
-08 महीने रहता है पर्यटन सीजन
-80 रिसोट्र्स सम क्षेत्र में





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