जैसलमेर. मरुस्थलीय जिले में भाई दूज का पर्व पारम्परिक ढंग से उत्साहपूर्वक मनाया गया। इसके साथ ही पांच दिवसीय प्रकाश-पर्व सोल्लास संपन्न हो गया। जैसलमेर व पोकरण शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस दिन काफी उल्लासपूर्ण माहौल देखने को मिला। भाई दूज के दिन भाई और भाभियों ने अपनी बहिनों और ननद को उपहार में नकद राशि और वस्त्र भेंट किए। इस दिन सुबह से ही शुभ मुुुुहूर्त में बहिनें अपने भाई के घर पहुंचना शुरू हो गई। उन्होंने भाई के अक्षत तिलक लगाकर उसके दीर्घायु होने की कामना की। देर शाम तक शहर के मुख्य मार्गों एवं गली-मोहल्लों में पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों में लकदक सजी महिलाओं व बालिकाओं की चहल-पहल बनी रही। दूर-दराज के क्षेत्रों एवं ग्रामीण अंचलों से भी कई महिलाएं भाई दूज मनाने यहां पहुंचीं। नगर में मिठाई की दुकानों पर काफी भीड़ देखने को मिली। दुकानदारों ने कई प्रकार की मिठाइयां तैयार कर सजावट की। इस अवसर पर बहिनों ने भाइयों के तिलक लगा कर उन्हें मिठाई खिलाई और उनकी दीर्घायु की कामना की।
सैलानियों ने भी उमंग के साथ मनाई दिवाली
जैसलमेर. दिवाली के प्रकाश पर्व ने जैसलमेर भ्रमण पर आए घरेलू सैलानियों के साथ सात समंदर पार से आए अलग सभ्यता व संस्कृति वाले विदेशी पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित किया। इन सैलानियों ने स्थानीय लोगों के साथ व आपास में मिलकर न केवल आतिशबाजी की बल्कि कुछ विदेशी सैलानियों ने लक्ष्मी पूजन की सामग्री की भी खरीद की। अलबत्ता उन्हें लक्ष्मी पूजन की महत्ता के बारे में ज्यादा पता नहीं था। सम सेंडड्यून्स के आसपास स्थापित रिसोर्ट्स आदि में दिवाली के रात जमकर धमाल हुआ। आकाश में उठते-गिरते आतिशी नजारों ने धोरों को जगमगा दिया। स्वर्ण-सी पीली रेत के कण अमावस की काली रात में जगमगा उठी।
इस मौके पर पर्यटन व्यवसायियों ने अपनी होटलों व प्रतिष्ठानों में सुन्दर सजावट की। विदेशी मेहमानों ने स्थानीय लोगों के साथ जमकर पटाखे छोड़े। बिना आवाज के फुलझडिय़ां, अनार और चक्करी चलाना उन्हें बेहद पसंद आया। उन्होंने रंग-बिरंगी रंगोलियों व जगमगाते दीपकों के बीच अपने व साथियों के फोटो खींचे। जैसलमेर की धरा पर इस तरह से 'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना इन क्षणों में साकार होती नजर आई। विदेशी सैलानियों महिलाओं व बच्चों के बीच दीपावली का उत्साह देखते ही बन रहा था। कईविदेशी महिलाओं व पुरुषों ने पारम्परिक भारतीय परिधान भी पहने।





No comments:
Post a Comment