पाली। बाली विधानसभा के कांग्रेस नेता हितेश सिरोया ने कार सवार अज्ञात लोगों पर फायरिंग का आरोप लगाया है। फायरिंग में हितेश बाल-बाल बच गए। फिलहाल इस बारे में कोई सुराग नहीं लगा है। घटना देसूरी थाना क्षेत्र के घाणेराव रोड की बताई जा रही है। पुलिस जांच में जुट गई है। देसूरी थानाधिकारी भंवरलाल पटेल ने बताया कि फालना के हितेश सिरोया ने पुलिस को दी लिखित शिकायत में आरोप लगाया कि उसका देसूरी में चुनावी कार्यालय है। सिरोया ने इस बार बाली विधानसभा से कांग्रेस से टिकट की दावेदारी की थी। मंगलवार शाम करीब चार बजे हितेश अपनी कार से देसूरी से फालना जा रहे थे। घाणेराव के निकट पीछे से आई एक कार उनकी कार को आेवरटेक करती हुई निकली और उसमें सवार एक जने ने फायरिंग की। कार तेज गति में निकल गई।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची।
पुलिस का कहना है कि कार या फायरिंग करने वाले कौन थे, यह जानकारी नहीं मिली है। खुद हितेश भी बंदूक या पिस्टल नहीं देख पाए। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
चुनावी टिकट दिलाने के नाम पर पूर्व विधायक से ढाई लाख ऐंठे
पाली/जोधपुर . पाली जिले के देसूरी विधानसभा क्षेत्र के एक पूर्व विधायक से विधानसभा टिकट दिलाने व अन्य चुनावी झांसे देकर ठग गिरोह ने ढाई लाख रुपए ऐंठ लिए। यह राशि उसे हनुमानगढ़ बुलाकर एेंठी गई। दो महीने तक टालमटोल के बाद राशि न लौटाए जाने पर मंगलवार रात एफआइआर दर्ज कराई गई।
पुलिस के अनुसार मूलत: पाली हाल भगत की कोठी सुभाष कॉलोनी जोधपुर निवासी पोकरलाल (७२) पुत्र पेमाराम मेघवाल ने प्रशांत किशोर व दीपक आदि के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया। पोकरलाल १९८५ में पाली जिले की देसूरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने। अब परिसीमन के बाद देसूरी क्षेत्र मारवाड़ जंक्शन विधानसभा बन गया है।
पूर्व विधायक पोकरलाल का कहना है कि गत १५ सितम्बर की सुबह प्रशांत किशोर बताने वाले एक व्यक्ति का उसके मोबाइल पर फोन आया। उसने उसे चुनावी झांसे दिए। विश्वास दिलाने के लिए उसने कहा कि वो उसकी फेसबुक प्रोफाइल देख सकता है। जिसे देखने पर
वहउसके झांसे में आ गए।
उस व्यक्ति ने विधानसभा का टिकट लेने के लिए पोकरलाल को ढाई लाख रुपए लेकर हनुमानगढ़ बुलाया, जहां वो एक होटल पहुंचा। फोन करने वाले ने दीपक नामक व्यक्ति को उसके पास भेजा और ढाई लाख रुपए ले लिए। इस दौरान पोकरलाल के साथ गोविंद मेघवाल भी था। जिसने दीपक के साथ फोटो भी खींचे थे। इसके बाद ठग ने उसे अपने पीए मनीष से बात करने का आग्रह किया।
एक बार उससे बात हुई, लेकिन बाद में उसके मोबाइल बंद मिले। २२ सितम्बर की सुबह उसने फिर फोन लगाया, लेकिन बंद मिला। दोपहर में उसका फोन आया तब पोकर ने उसकी राशि लौटाने का आग्रह किया, लेकिन वो टालमटोल करते रहे।





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