रावतभाटा. यहां राजस्थान परमाणु बिजलीघर के नजदीक करीब 2 हजार 4 सौ करोड़ की लागत से निर्माणाधीन देश के दूसरे न्यूक्लियर फ्यूल कॉम्पलेक्स (एनएफ सी) प्लांट कार्यस्थल के ऊपर रात में अज्ञात संदिग्ध द्वारा ड्रोन उड़ाने का मामला सामने आया है। संदिग्ध ने प्लांट के पिछवाड़े चंबल नदी में बोट में बैठकर रिमोट से ड्रोन उड़ाने की घटना को अंजाम दिया। इसे गंभीर मान सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुट गई हैं।
जानकार सूत्रों के अनुसार यह घटना करीब दस दिन पहले की है। निर्माणाधीन प्लांट के ऊपर ड्रोन उड़ता हुआ वहां कार्यरत श्रमिकों ने देखा। उन्होंने तुरंत सुरक्षा अधिकारियों को सूचना दी। सुरक्षा एजेंसियों के जवान जैसे ही ड्रोन पर नियंत्रण के जतन करने लगे तो इसकी भनक लगने पर संदिग्ध ने तुरंत रिमोट के जरिए ड्रोन को बोट में उतार लिया। इसके बाद वह अंधेरे का फ ायदा उठाकर नदी के रास्ते भाग गया।
ऐसे पता चला, बोट से उड़ाया ड्रोन
सूत्रों ने बताया कि वॉच टावर पर बैठे सुरक्षा बल के जवानों ने भी नदी के पानी में एक बोट को देखा। इसके बाद उन्होंने पीछा किया तो संदिग्ध ड्रोन को उतारकर नाव की सहायता से भागने में सफ ल हो गया।
विजलेंस टीम ढूंढऩे में जुटी
सूत्रों ने बताया कि इस घटना को प्लांट की सुरक्षा में सेंध मानते हुए एनएफसी प्रबंधन ने संदिग्ध को ढूंढऩे सहित सारी जानकारी जुटाने का काम सेंट्रल विजलेंस विभाग को सौंप दिया है। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि कौनसे उपकरण लगाकर ड्रोन को उड़ाया गया तथा उसमें विस्फ ोटक तो नहीं था।
क्या है एनएफ सी प्लांट
देश में वर्ष 1960 के दशक के मध्य परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की शुरुआत हुई। देश में स्थापित हुए न्यूक्लियर पावर प्लांटों में ईंधन के रूप में काम आने वाली यूरेनियम ऑक्साइड की छड़ें प्राकृतिक यूरेनियम से तैयार करने के लिए देश में एक मात्र हैदराबाद में वर्ष 1971 के दशक में न्यूक्लियर फ्यूल कॉम्पलैक्स (एनएफसी) प्लांट लगाया गया। रावतभाटा में निर्माणाधीन यह संयंत्र देश का दूसरा संयंत्र होगा।
यह दूसरा प्लांट लगाने की वर्ष 2014 में केन्द्र सरकार ने मंजूरी दी। तीन साल पहले 9 सितम्बर 2015 को परमाणु ऊर्जा विभाग के अध्यक्ष डॉ. शेखर बसु ने इसका शिलान्यास किया।
विजलेंस को सौंपा है जांच का काम
निर्माणाधीन एनएफ सी प्रोजेक्ट स्थल के ऊ पर ड्रोन चंबल नदी साइड से कौन उड़ रहा रहा था। उसका मकसद क्या था। इसका पता अभी नहीं चल पाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का काम सेंट्रल विजीलेंस विभाग को सौंप दिया है।
पीए प्रताप, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएफसी रावतभाटा





No comments:
Post a Comment