नोखा. मूलवास-सीलवा स्थित पदम पैलेस में चल रही राम कथा में संत समागम के दौरान रोजाना देशभर के ख्यातनाम साधु-संत शिरकत कर रहे हैं। साधु-संतों ने गोसेवी पदमाराम कुलरिया द्वारा समाज सेवा, गोसेवा व पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों को देखते हुए भगवा चादर ओढ़ाकर संत की उपाधि दी है।
यह उपाधि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के परमाध्यक्ष संत नरेंद्रगिरी, काष्र्णि पीठाधीश्वर गुरुशरणानंद वृदांवन, ऋषिकेश के चिदानंद सरस्वती, संवित सोमगिरि सहित अन्य संतों की ओर से प्रदान की गई है। कथा सुनने के लिए बीकानेर, चूरू, नागौर, जोधपुर सहित अन्य जिलों से बड़ी तादाद में भाग लेते हैं। संत मुरलीधर कथा का वाचन कर रहे हैं। कथा १८ नवंबर तक होगी।
संत की उपाधि के लिए विग्रह नहीं, भाव जरूरी
संत समागम में शिरकत करने वाले ख्यातनाम साधु-संतों ने कहा कि संत की उपाधि के लिए साधु जैसा विग्रह होना जरुरी नहीं है। भाव जरुरी होता है। गृहस्थी होते हुए भी गोसेवी पदमाराम कुलरिया समाज व गायों की सेवा और पर्यावरण को बचाने के लिए तन-मन-धन से समॢपत हैं। संत परंपरा का जो वटवृक्ष गोसेवी पदमाराम कुलरिया के पिता चतुराराम कुलरिया ने लगाया था, उसे उनके बड़े पुत्र संत दुलाराम कुलरिया ने गो भक्ति और सेवा के माध्यम से सींचा। उसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए गो सेवी संत पदमाराम कुलरिया गो भक्ति और समाज सेवा की भावना से पल्वित कर रहे हैं।





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