दौसा ग्रामीण. देवउठनी एकादशी के अवसर पर श्रीश्याम मन्दिर चरणधाम पर श्यामप्रभु का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान श्याम प्रभु की नयनाभिराम झांकी आकर्षण का केन्द्र रही। कार्यक्रम में कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति देकर भक्तों को भाव विभोर कर दिया। बाल कलाकार ऋतिक गुप्ता ने भी आकर्षक प्रस्तुति देकर श्रोताओं की वाह-वाही लूटी। इस दौरान महिलाओं व पुरुषों ने भजनों पर जमकर नृत्य किया। रात्रि 12 बजे बधाई उत्सव मनाकर श्याम प्रभु के 56 भोग की झांकी सजाई गई।
महुवा ग्रामीण. यहां श्री श्याम मंदिर में सोमवार रात्रि श्यामबाबा के जन्मोत्सव को लेकर सुबह निशान यात्रा निकाली गई। जो श्याम मंदिर से शुरू होकर मेन मार्केट, तहसील रोड होती हुई वापस श्याम मंदिर पहुंची। निशान यात्रा का जगह जगह पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। इसके बाद बाबा श्याम के अखंड ज्योति पाठ शुरू हुए। रात्रि में बाबा श्याम की ज्योत प्रज्वलित कर बाबा को रिझाया गया। स्थानीय कलाकार पवन शर्मा ने गणेश वंदना, हनुमान वंदना, गुरुदेव को मना कर बाबा श्याम के जागरण की शुरुआत की। हरिओम सिंहल मधुर ने कीर्तन की है रात, सांवली सूरत पे मोहन, नैनन में श्याम समाय गो, पंडित हजारी लाल शर्मा ने तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे, कितनी खातरी करवा वे, रंगीन गुब्बारों से मंडप सजाया है हम तो बोलेंगे श्याम हैप्पी बर्थडे टू यू भजन गाकर व बाबा को केक का भोग लगा कर बाबा श्याम का जन्म उत्सव मनाया। इस दौरान रामबाबू गुप्ता, नवीन बंसल, कन्हैया लाल शर्मा, नीरज बंसल, मोहनलाल बंसल, हनुमान सहाय बंसल, पवन बंसल,भावना शर्मा ,रीना शर्मा , माया शर्मा सहित अनेक भक्त मौजूद थे।
कथा में सुनाई श्रीकृष्ण की बाल लीला
बांदीकुई . शहर के अलवर-सिकंदरा मेगा हाइवे पर मुकरपुरा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। जन्मोत्सव में हाथी-घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की भजनों से समूचा वातावरण भक्तिमय हो गया। कृष्ण की सजीव झांकी सजाई गई। जहां श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। भजनों पर श्रद्धालु भाव विभोर होकर नाचे। स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने लोगों को बारिश से बचाव के लिए गोवर्धन पर्वत को अंगुली पर उठाकर रक्षा की। गोवर्धन पूजा भी की गई। इस मौके पर विश्रामसिंह माल, रामगोपाल माल, टीकमसिंह, अंगद माल, हनुमान फौजी, गिर्राज पहलवान एवं राजेन्द्र बैंसला भी मौजूद थे।





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