नाथद्वारा. पुष्टिमार्गीय वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधानपीठ प्रभु श्रीनाथजी की नगरी में दीपोत्सव का पांच दिवसीय पर्व वैष्णवों के भारी सैलाब के साथ मनाया गया।
अन्नकूट लूटने प्रदेश के विभिन्न स्थानों से सैकड़ों आदिवासी पहुंचे, जिनकी मंदिर मंडल के साथ ही शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों के द्वारा भी आवभगत की गई। इस बार अन्नकूट लूटने आदिवासियों का जबर्दस्त सैलाब उमड़ा। वहीं, दीपावली के दिन बुधवार को कान्ह जगाई के साथ लक्ष्मी पूजन भी घर-घर में शुभ मुहूर्त के अनुसार किया गया। प्रधानपीठ में बिराजित प्रभु श्रीनाथजी के यहां त्यौहार में सबसे महत्वपूर्ण अन्नकूट का त्यौहार रहा। इसमें श्रीजी बावा के सन्मुख सजाए विशेष प्रसाद को रात्रि को लूटने की जैसे ही शुरुआत की गई तो पूरे मेवाड़ अंचल से आए सैकड़ों आदिवासी समाज के सदस्यों ने अपने गले में बना रखी कपड़े की विशेष झोली के साथ मंदिर में प्रवेश करना शुरू कर दिया। इन्होंने चावल सहित रखे सभी प्रसाद में जो हाथ लगा उसेे झोली एवं मटकियों आदि में भरकर ले जाने लगे। भील सदस्य धीं-धीं करते हुए प्रसाद लेकर अपने साथ आए परिवार के सदस्यों को थमाने लगे। कई आदिवासी श्रीजी के डोल तिबारी एवं रतन चौक में जमाकर रखे चावल आदि प्रसाद को बड़े भाव से अपने गले में बनाई विशेष झोली में भरकर ले गए। कई आदिवासी चावल के साथ मटकों को भी एक ही बार में उठाकर साथ में ले गए। लगभग पौन घंटे से भी अधिक समय तक चले इस क्रम में सभी के हाथ जितना प्रसाद लगा लेकर गए। वहीं, मंदिर मंडल के मुख्य निष्पादन अधिकारी जितेन्द्र कुमार ओझा, श्रीकृष्ण भंडार के अधिकारी सुधाकर उपाध्याय कई श्रद्धालुओं, पुलिस उपाधीक्षक ओम कुमार, वृत निरीक्षक जितेन्द्र आंचलिया, मंदिर के ग्वाल-बालों एवं होमगार्ड के जवानो आदि ने भी इन आदिवासी सदस्यों को प्रसाद ले जाने में सहयोग किया ।
चावल के साथ अन्य प्रसाद
प्रभु श्रीनाथजी को भोग लगाए जाने वाले प्रसाद में मंदिर की परंपरानुसार ३९ सौ किलोग्राम चावल का भोग लगाया जाता है, परंतु चावल की सेवा श्रद्धालु वैष्णवों द्वारा भी की जाती है, जिससे यह चावल की मात्रा ५ हजार किलोग्राम से भी ज्यादा हो गई। इसके साथ वड़ा, मंगोड़ा,सूखी काचरी, ग्वारफली आदि कई प्रकार के १५ आइटम एवं सेव और थूली के व्यंजन की लगभग ४०- ४० नांद (मटकियां) का भोग लगाया गया।
श्रीजी संग बिराजे निधि स्वरूप व युगल स्वरूप
अन्नकूट के दर्शन के समय आराध्य प्रभु श्रीनाथजी की गोद में निधि स्वरूप लाड़ले लालन एवं द्वितीय पीठ में बिराजित युगल स्वरूप विट्ठलनाथजी को भी श्रीजी के संग बिराजित किया गया। श्रद्धालुओं ने डोल तिबारी में खड़े रहकर गिरिराज धरण एवं जुगल जोड़ी सरकार की जय के खूब जयकारे लगाए।
व्यवस्था में बदलाव
पुरुषों को मंदिर दर्शन जाने के लिए प्रीतम पोल से व्यवस्था की गई। यहां पर प्रवेश के लिए प्रीतमपोल के अन्दर से मीरा मंदिर के पास तक की जगह को कवर करते हुए कनातें लगाई गई।
तिलकायत ने उतारी आरती
मंदिर के गोवर्धनपूजा चौक में गुरुवार शाम को बनाए गए गोबर के गोवर्धन पर्वत की तिलकायत राकेश महाराज एवं पुत्र विशाल बावा तथा तृतीयपीठ विट्ठलनाथजी मंदिर के, श्रीनाथजी के बड़े मुखिया इन्द्रवदन गिरनारा, प्रदीप सांचीहर लालन के मुखिया भगवानदास सांचीहर, घनश्याम सांचीहर, रजनीकांत सांचीहर आदि की उपस्थिति में पूजन प्रारंभ किया गया। इसके बाद नंदरायजी के वंश की मुख्य गोशाला के द्वारा गोवर्धन को घूंदवाया गया। श्रीनाथजी की मुख्य गोशाला के हेड ग्वाल दीपक गुर्जर एवं अन्य ग्वाल-बालों के केसर व कुमकुम के छापे लगाकर विदाई दी। इस अलौकिक मनोरथ के समय प्रभु श्रीनाथजी के निधि लाड़ले लालन को सूरजपोल के चबूतरे पर बिराजित किया गया।
कान्ह जगाई
दीपावली पर प्रभु श्रीनाथजी मंदिर में ठाकुरजी को अलौकिक शृंगार धराया गया। श्रीनाथजी के निधि स्वरूप लालन के बिराजमान होने के बाद तिलकायत राकेश महाराज ने नंदवंश की मुख्य गो माता के कान में कान्ह जगाई की परम्परा का निवर्हन किया गया।
गोमाता को रिझाया
श्रीजी की नगरी में गोवर्धन पूजा के अवसर पर को जब गो माता को मंदिर में गोवर्धन पूजा के लिये ले जाया गया तब मंदिर के मुख्य मार्गों से ग्वाल बालों ने गो माता को रिझाते हुए विशेष परिधान के साथ मंदिर तक ले गए। अपरान्ह ढाई बजे जब ग्वाल-बाल हीड़ गायन के साथ मंदिर परिक्रमा करते हुए मोतीमहल नीचे स्थित गायों के रखने के स्थान पर पहुंचे और गो क्रीड़ा के लिए गोमाता को चौपाटी मंदिर मार्ग आदि से होकर नक्कारखाना चौक तक लाए। ग्वाल बालों ने मंदिर की परंपरागत वेशभूषा में गोमाता को क्रीड़ा करवाई।
आदिवासियों का उत्साह रहा अपार
पिछले साल की तरह ही इस बार भी अन्नकूट लूटने मेवाड़ अंचल के भील आदिवासियों का सैलाब उमड़ पड़ा। इससे ये लोग जब सूरजपोल के गेट पर पहुंचे तो मंजर देखने लायक था।
आभूषणों से सुशोभित हुए श्रीजी
दीपावली व अन्नकूट के अवसर पर श्रीजी को अलौकिक शृंगार धराया गया। श्रीजी को श्रीमस्तक पर मयूर पंख का अद्र्ध चन्द्राकार मुकुट धराया गया। जड़ाव के नेत्र बांसुरी केसरिया फूंदों से कलात्मक वेणुजी (चोटी) धराई गई। ठाड़े केसरिया वस्त्र को धारण करा श्रीजी को हीरा, पन्ना, माणक, मोती के स्वर्णाभूषण धराए व हीरे आदि रत्नों से जडि़त चोगटा भी धराया गया। श्रीजी के निधि स्वरूप लालन को भी इसी भाव का चिताकर्षक शृंगार धराया गया। इस अवसर पर द्वितीय पीठ के युगल स्वरूप विट्ठलनाथजी भी एवं लाड़ले लालन प्रभु श्रीनाथजी की गोद में बिराजित हुए।
हटडी में बिराजे निधि स्वरूप
श्रीजी बावा के निधि स्वरूप लाड़ले लालन बुधवार को दीपावली पर रतन चौक में हटड़ी में बिराजित किया गया। कांच की अलौकिक हटड़ी में बिराजे निधि स्वरूप का हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ लिया।
विशेष कीर्तन : अन्नकूट के अवसर पर श्रीजी मंदिर में मुखिया कीर्तनकार तोलाराम के नेतृत्व में कीर्तनकारों ने अन्नकूट के अवसर पर गुड़ के गुंजा पुआ सुहारी गोधन पूजत व्रज की नारी घर-घर गोमय प्रतिमा धारी बाजत रुचिर पखावज थारी गोद लिये मंगल गुन गावत कमल नयन को पाय लगावत आदि के साथ कई कीर्तन किए।
मेला लगा
अन्नकूट के अवसर पर आए आदिवासियों का शहर में मेला लगा। इससे रिसाला चौक में डोलर चकरियां आदि लगाई गई। इसी प्रकार लाल बाजार, इंदिरा रोड, लंबी सडक़ पर फुटपाथ पर विभिन्न दुकानें लगी। हालांकि रिसाला चौक में मिटटी उडऩे से लोगों को परेशानी हुई । वहीं वाहनों की आवाजाही इस रोड पर पूरी तरह से नहीं रुकने से भी मेले में लोगों को परेशान होना पड़ा।
भाईदूज मनाई : भाईदूज का त्यौहार शुक्रवार को मनाया, जिसमें बहनों ने भाइयों को तिलक कर मुंह मीठा कराया। भाइयों ने भी बहनों को उपहार आदि प्रदान किए। इधर, मंदिर मंडल के साथ शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं तथा अन्य दानदाताओं के द्वारा अन्नकूट लूटने पहुंचे आदिवासी परिवार के सदस्यो के लिये भोजन के पैकेट की व्यवस्था की गई। वहीं, अहिल्या कुंड पर मित्र मंडली के द्वारा बिठाकर भोजन जिमाया गया।
सुरक्षा में जबर्दस्त जाब्ता
अन्नकूट पर शहर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए जबर्दस्त सुरक्षा इंतजाम किए गए। इसमें पुलिस उपाधीक्षक, सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों के साथ साथ एएसआई, हेड कांस्टेबल एमबीसी सहित कई अतिरिक्त टुकडिय़ां व होमगार्ड आदि को तैनात किया गया। जबकि मंदिर मंडल के द्वारा माणक चौक में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया।
ये रहे अधिकारी मौजूद
अति. जिला पुलिस अधीक्षक राजेश भारद्वाज के नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक ओमकुमार, कुंभलगढ़ डीवाईएसपी मंजीतसिंह भीम से भरतसिंह, एसीएसटी सेल राजसमंद से लाभूराम, वृत निरीक्षक जितेन्द्र आंचलिया, थानाधिकारी देलवाड़ा भरतसिंह खमनोर महेश मीणा रेलमगरा लीलाधर मालवीय आदि तैनात रहे।






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