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स्टरलाइट संयंत्र की बंदी पर वेदांता को एनजीटी से राहत, तमिलनाडु सरकार के फैसले को पैनल ने बताया अनुचित

नर्इ दिल्ली। तमिलनाडु के तुतीकोरिन में स्टरलाइट के तांबे के कारखाने को बंद किए जाने के मामले में वेदांता समूह को नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की ओर से बड़ी राहत मिली है। इस मसले पर एनजीटी की ओर से गठित पैनल ने संयंत्र की बंदी को अनुचित बताया है। मेघालय उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरुण अग्रवाल की अध्यक्षता वाले पैनल ने कहा है कि तमिलनाडु सरकार ने स्टरलाइट को इसके लिए कोई नोटिस नहीं दिया। कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं दिया गया। न्यायाधिकरण ने राज्य सरकार से इस मामले में एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा गया है।


तीन सदस्यों की रिपोर्ट से राहत की उम्मीद

पैनल ने कहा है कि राज्य सरकार संयंत्र को बंद करने के बहुत से कारण बता सकती है, पर इसे बंद किया जाना न्यायसंगत नहीं है। तीन सदस्यीय पैनल की इस रिपोर्ट के बाद वेदांता समूह के लिए अपने इस संयंत्र को दोबारा खोलने की राह खुलती दिख रही है। इसके साथ ही पैनल ने कारखाने के आसपास के क्षेत्र में भूगर्भ जल का नियमित निरीक्षण करने बात भी कही है। साथ ही इस संबंध में आने वाले अन्य सुझावों को सुनने की बात भी कही है।


अप्रैल में प्लांट बंद करने के लिए की गर्इ थी सिफारिश

तमिलनाडु सरकार ने वेदांता समूह के स्वामित्व वाले तांबा प्रगालक संयंत्र को बंद करने के आदेश जारी किया था। राज्य सरकार ने यह आदेश स्टरलाइट संयंत्र के चालू रहने को लेकर विरोध के दौरान पुलिस गोलीबारी में 13 लोगों की मौत के एक हफ्ते के बाद जारी किया था। सरकार के आदेश में कहा गया था कि सरकार के ध्यान में यह लाया गया है कि तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) ने इस साल नौ अप्रैल के अपने आदेश में तूतीकोरिन के तांबा प्रगालक संयंत्र के संचालन की सहमति का नवीनीकरण नहीं किया और इसके बाद 23 मई को पीसीबी ने इसे बंद करने व बिजली आपूर्ति के कनेक्शन काटने के निर्देश जारी किए हैं।


सीएम ने जारी किया था आदेश

आदेश में कहा गया था, "जल अधिनियम 1974 के 18 (1)(बी) की धाराओं के तहत व्यापक जनहित में सरकार टीएनपीसीबी के बंद करने के निर्देश का समर्थन करती है और टीएनपीसीबी को इकाई को सील करने व संयंत्र को स्थायी रूप से बंद करने का निर्देश दिया।" मुख्यमंत्री ई.के. पलनीस्वामी ने एक अलग बयान में कहा कि तांबा प्रगालक संयंत्र के 'संचालन की सहमति' इस साल मार्च में समाप्त हुई थी और इसे टीएनपीसीबी द्वारा नवीनीकृत नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा था कि 24 मई को संयंत्र की बिजली व पानी के कनेक्शन की आपूर्ति काटी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा उस दौरान कहा था कि तूतीकोरिन के लोगों की संयंत्र को बंद करने की मांग स्वीकार कर ली गई है और इस प्रभाव के आदेश जारी कर दिए गए हैं।



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