अजमेर. बढ़ते ऑनलाइन बाजार ने जिले के व्यापारियों की खुशियां छीन ली हैं। दीपावली पर बम्पर बिक्री की आस लगाए व्यापारी सीजन में भी ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि ऑनलाइन बिक्री में सबसे ज्यादा हिस्सा इलेक्ट्रोनिक्स और कपड़ों का है। लेकिन इसका असर हर जगह पड़ रहा है। लोग ऑफर के चक्कर में धड़ल्ले से ऑनलाइन सामान खरीद रहे हैं। इससे दुकानदारों के पास पैसा नहीं आ रहा है और त्योहार फीके हो रहे है।
जानकारों के अनुसार दो वर्ष पहले जिले में नवरात्र से दीपावली के दौरान 70 करोड़ तक का इलेक्ट्रोनिक्स का व्यापार होता था। इसमें स्थानीय व्यापारी ही जमकर माल बेचता था। अब यह आंकड़ा तो बढ़ गया, लेकिन ऑनलाइन डिस्काउन्ट के कारण ग्राहक ऑनलाइन खरीदारी करने लगे जिससे व्यापार ऑनलाइन की ओर शिफ्ट हो गया। शहरी दुकानदारों का हिस्सा लगातार कम होता जा रहा है। इससे इलेक्ट्रोनिक्स, कपड़ों और जूतों का व्यापार बहुत बड़े स्तर पर प्रभावित हुआ है। व्यापारियों के पास पैसा नहीं आने से शहरी अर्थ व्यवस्था प्रभावित होगी क्योंकि एक व्यापार से दुकानदार सहित उसके कर्मचारी भी सीधे तौर पर जुड़े होते हैं।
सभी जगहों पर असर
स्थानीय स्तर पर पैसा नहीं आने का असर अब पटाखों, मिठाई, सूखे मेवों सहित अन्य पर दिखाई देने लग गया है। शीतल पेय के होलसेल व्यापारी ने बताया पहले दीपावली के आस-पास एक लाख रुपए का शीतल पेय रोज बेच लेते थे। लेकिन इस बार यह 20 हजार रुपए है।
व्यापारियों का पैसा अटका
उधर त्योहारी सीजन में अच्छी बिक्री की उम्मीद में व्यापारियों ने स्टॉक करके रख लिया। लेकिन अब तक सामान्य बिक्री भी नहीं हुई है। क्योंकि व्यापारी अधिकतर बैंक और अन्य निजी स्तर पर रकम का व्यवस्था करते हैं इसलिए बिक्री नहीं होने के कारण व्यापारियो की रकम अटक गई है। अब बस वे धनतेरस से बाजार चलने की उम्मीद लगा रहे है, ताकि उनकी फंसी रकम निकल सके।
35 लाख से 3 लाख
इलेक्ट्रोनिक व्यापारी हरीश कोरवानी के अनुसार पहले हम नवरात्र में 35 लाख रुपए तक का सामान बेच देते थे। इनमें 70 प्रतिशत टीवी, 20 प्रतिशत फ्रीज बाकी 10 प्रतिशत में सभी उत्पाद आ जाते थे। लेकिन इस बार बिक्री का आंकड़ा तीन लाख रुपए भी नहीं पहुंचा है। पुष्य नक्षत्र भी खाली ही गया। कारोबार तीन लाख तक भी नहीं पहुंचा है।
व्यापारियों पर दोहरी मार
ऑनलाइन शॉपिंग करने से पहले लोग स्थानीय शोरूम में जाकर प्रोडक्ट की पूरी जानकारी तो ले लेते हंै लेकिन बाद में उससे मिलते जुलता उत्पाद ऑनलाइन सस्ता देखकर उसे ऑर्डर कर देते है। इससे व्यापारियों पर दोहरी मार पड़ती है। नई-नई ऑनलाइन कंपनियां अपने उत्पाद सस्ते में बेच देती है। ऑन लाइन व्यापार की मार सबसे ज्यादा टीवी पर पड़ी है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था चरमराई
ऑनलाइन खरीददारी से स्थानीय अर्थव्यवस्था चरमरा गई है, क्योंकि पैसा आपके शहर व गांव में नहीं दूसरे देशों में जा रहा है। यदि स्थानीय स्तर पर खरीद होती है तो एक व्यापारी दूसरे से खरीददाता है और पैसा घूमता रहा है। इसके चलते सभी अपना-अपना मुनाफा कमाते है। लेकिन आज के दौर में बर्तन का व्यापारी ऑन लाइन टीवी मंगा रहा है, तो दूसरा व्यापारी जूते मंगा रहा है। सबसे पहले यह प्रथा रोकनी होगी। इससे सबके घरों में खुशियां आएंगी।
-डॉ. संत कुमार, महानगर संयोजक स्वदेशी जागरण मंच





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