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गुड़ामालानी: नर्मदा का नीर ही बड़ी पीर

पचपदरा विधानसभा सीट
गुड़ामालानी: नर्मदा का नीर ही बड़ी पीर
गुड़ामालानी . धोरीमन्ना कस्बे में राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुल बनाया गया है। चार साल से पुल का निर्माण चल रहा है, पूरा नहीं होने का मलाल लोगों को है। पुल के पास की सड़क इतनी संकड़ी हो गई है कि वाहनों का निकलना मुश्किल। धोरीमन्ना बाड़मेर-गुजरात हाईवे का बड़ा कस्बा है।
यहां दुर्घटना और आत्महत्या के प्रयास के मामले ज्यादा आते हैं। दोनों में मरीज की जान बचाना जरूरी है,लेकिन अस्पताल की सुविधाएं कमजोर होने पर गुजरात रैफर करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में पदरिक्तता के कारण हाल खराब है। धोरीमन्ना कस्बा अतिक्रमण की जद में भी है, लेकिन यहां दबंगों के सामने बोलने की हिम्मत अधिकारी जुटा नहीं पाते। धोरीमन्ना से आगे गुड़ामालानी के रास्ते चले तो यहां नर्मदा नहर की वितरिकाएं सूखी पड़ी थी और फिर से निर्माण ही नहीं हुआ है। दरअसल नर्मदा का पानी जिन गांवों में पहुंचा है वहां फसलें लहलहा रही है और लोग आर्थिक संपन्नता जीने लगे है, लेकिन तीस से ज्यादा ग्राम पंचायतें अभी भी तरस रही है। यहां पीने के पानी का संकट भी है।
पिता-पुत्र दोनों, हेमाराम को पुत्र वियोग
विधायक लादूराम विश्नोई संसदीय सचिव बन गए और उनके बेटे के के विश्नोई भाजपा प्रदेश मंत्री। पिता लोगों के साथ रहे तो पुत्र ने भी अपनी राजनीति के लिए यहां कई नवाचार कर लोगों से जुड़ाव बढ़ाया। विपक्ष में कांग्रेस के हेमाराम चौधरी के पुत्र का देहांत होने से वे दो साल पुत्र वियोग में रहे। पुन: राजनीतिक सक्रियता का निर्णय लिया और अब लोगों के बीच पहुंच रहे है।
2013 का चुनाव परिणाम
नाम पार्टी कुल मत प्रतिशत
लादूराम भाजपा 91619 56.47
हेमाराम कांग्रेस 58464 36.04
रिड़मलराम सीपीआइ 3042 1.88
सुमारखान बसपा 2734 1.69
नरेन्द एनपीपी 2717 1.67
जीत हार का अंतर
91619 मत मिले भाजपा के लादूराम विश्नोई को
58464 मत मिले कांग्रेस के प्रत्याशी हेमाराम चौधरी को
33452 मत से लादूराम विश्नोई की जीत
विधायक निधि में खर्च
वर्ष बजट व्यय कार्य
2014-15 106.04 36
2015-16 211.73 71
2016-17 266.60 68
2017-18 249.21 43
2018-19 215.19 60
(राशि लाखों रुपए में )
नदी में पानी और कट जाती है 8 पंचायतें : यहां की आठ ग्राम पंचायतों की समस्या अलग है। यहां लूनी नदी में पानी आते ही ये ग्राम पंचायतें गुड़ामालानी और पूरे क्षेत्र से कट जाती है। तीन महीने तक पानी नहीं उतरने तक इनके लिए कैद जैसी जिंदगी है। यहां रतनपुरा के पास पुल के निर्माण की मांग पूरी नहीं हो रही है।
सबसे बड़ा मुद्ïदा नहरी पानी
गुड़ामालानी का सबसे बड़ा मुद्दा नहरी पानी है। नर्मदा नहर परियोजना से गुड़ामालानी, धोरीमन्ना और सिणधरी क्षेत्र की 40 से अधिक ग्राम पंचायतों केा पेयजल के लिए पानी नहीं मिला है। गुुजरात से पूरा पानी मिलने के बावजूद यहां निर्माण कार्य समय पर नहीं होने का खामियाजा लोग भुगत रहे है। बीते एक वर्ष तो नहर निर्माण के चलने पानी नहीं मिला। किसानों को आंदोलन करना पड़ा।
दो बड़े कस्बे, दोनों में हों सुविधाएं
कम आबादी के कारण क्षेत्र के दोनों बड़े कस्बे गुड़ामालानी और धोरीमन्ना नगरपालिका नहीं बन सकते। ग्राम पंचायतों के पास संसाधन और आय सीमित है। ग्रामीण कहते है कि सरकारों को अब बीच का रास्ता निकालना होगा। जिन ग्राम पंचायतों की आबादी आठ हजार से अधिक हो रही है और बीस से ज्यादा वार्ड है वहां अब मिनी नगरपालिका जैसी कोई इकाई हों जो इनके समुचित विकास पर ध्यान दें।
विकास की आस
गुड़ामालानी में प्रा$कृतिक गैस का खजाना मिला है, लेकिन इसके उत्पादन की अनुमति नहीं मिलने से ग्यारह साल से मामला अटका है। तेल के ब्लॉक ने आर्थिक उन्नति दी है। उम्मीद नए ब्लॉक से है। तेल-गैस और नर्मदा का नीर तीन संयोग मिल जाए तो प्रदेश के आत्मनिर्भर इलाकों में यह क्षेत्र शामिल हो जाएगा।
प्रमुख समस्याएं
- पेयजल व सिंचाई के लिए पानी
- कॉलेज में व्याख्याताओं की कमी
- अस्पताल में चिकित्सकों के 50 से अधिक पद रिक्त
- धोरीमन्ना कस्बे में ओवरब्रिज का अधूरा कार्य
- अतिक्रमण की जद में धोरीमन्ना और गुड़ामालानी
महिलाओं और युवाओं के मुद्ïदे
शिक्षा के क्षेत्र में धोरीमन्ना जिले में अग्रणी है। युवतियों की शिक्षा में भी अग्रणी। यहां बीएड, बीएसटीसी, कॉलेज और नर्सिंग इंस्टीट्युट युवतियों के लिए खुलने की मांग है। क्षेत्र में सीनियर स्तर के बालिका विद्यालय भी खुलने चाहिए। युवाओं की रुचि कृषि में है, कृषि के लिए भी यहां सीनियर स्कूल के विद्यालय ही नहीं कॉलेज स्थापित करने की दरकार है।
कस्बे का अस्पताल नेत्र चिकित्सक के भरोसे
पत्रिका टीम इसके बाद बड़े कस्बे गुड़ामालानी पहुंची। यहां अस्पताल एक नेत्र चिकित्सक के भरोसे चल रहा है, शेष पद खाली है। लोग निजी अस्पतालों के भरोसे है। यही हाल यहां के कॉलेज का है। यहां एक व्याख्याता के भरोसे पूरा कॉलेज है। प्राचार्य सहित 15 पद खाली है। रोडवेज की बस का भी अभाव है। बड़ा कस्बा होने के बावजूद यह बाड़मेर जिला मुख्यालय से रोडवेज से नहीं जुड़ा हुआ है।



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