आस्ट्रिया में ६ साल के बच्चे जुड़ जाते कला से
मन के भावों को मूर्तरूप देना ही कला
पिलानी. कलाकार को अपने मन में छुपी कला की साधना करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। यह कहना है अर्जेन्टीना की ख्यात कलाकार मारिसा काईब्ची ओलो का। ओलो कस्बे के बिरला बालिका विद्यापीठ में चल रही अंतरराष्ट्रीय आर्ट मीट में भाग ले रही है।
ओलो सोमवार को राजस्थान पत्रिका से खास बातचीत कर रही थी। उन्होंने कहा कि मन के भावों को चित्रित करना ही कला है। इससे कलाकार को मन को शांति मिलती है। पिछले कुछ दशकों से कला का बाजारीकरण हो गया है जिस के चलते कला पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसी का प्रभाव है कि आज दुनिया भर में चुनिन्दा कलाकारों को छोड़कर शेष को अपनी आजीविका चलाने के लिए शिक्षण जैसे कार्य करने पड़ रहे हैं। ओलो ने माना कि कला को किसी देश की सीमाओं में बांधा नहीं जा सकता है। यह एक सहज क्रिया है जो समय के साथ चलती रहती है। एक सवाल के जवाब में ओलो ने कहा कि भारतीय जीवन शैली को कला से जोड़ा गया है। यही वजह है कि भारत में जीवन शैली को केन्द्र बिन्दु बना कर कला को निखारा जाता है। उन्होने माना कि न केवल भारत में बल्कि विश्व में लगभग सभी देशों में महिला कलाकारों को अपनी कला की साधना करने के लिए ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है। इसी प्रकार आर्ट मीट में भाग ले रही आस्ट्रिया की सिनियर कलाकार क्रिश सीजैन थाउस ने पत्रिका से बातचीत करते हुए कला को शिक्षण में अनिवार्य करने की बात कही। उन्होंने अपने देश आस्ट्रिया का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके यहां छह वर्ष की आयु से ही बच्चे को कला से जोड़ देते हैं।
मनाएंगे राष्ट्रीय एकता सप्ताह
झुंझुनूं. जिले में राष्ट्रीय एकता सप्ताह (कौमी एकता सप्ताह) सोमवार से 25 नवम्बर तक मनाया जाएगा। अतिरिक्त जिला कलक्टर राजेन्द्र प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि साम्प्रदायिक सदभाव, राष्ट्रीय एकता दिवस को बढावा देने के लिए जिला पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में जिले के सभी विभागों की ओर से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वायतशाषी संगठन नेशनल फाउंडेेशन ऑफ कम्यूनल हॉरमनी (एनएफसीएच) द्वारा गृह मंत्रालय के साथ मिलकर कौमी एकता सप्ताह कम्प्यूनल हॉरमनी फ्लेग-डे 25 नवम्बर को मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है।





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