भुवनेश पण्ड्या / उदयपुर . आम आदमी की थाली तो महंगी हुई ही है, लेकिन अब उसमें परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता जांच तक महंगी हो गई है। जांच दर में बढ़ोतरी भी कम नहीं बल्कि सीधे सौ गुना हुई है। खाद्य सामग्री की जांच कुछ वर्ष पूर्व दस से बीस रुपए में हो जाती थी, अब उसके एक हजार रुपए लग रहे हैं, तो जांच कौन करवाएगा?
उल्लेखनीय है कि खाद्य सुरक्षा लैब में नियमानुसार कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री, भोजन या पेय पदार्थ की सशुल्क जांच करवा सकता है। निजी तौर पर खाद्य सामग्री की जांच करवाने के लिए अब लोगों की जेब ढिली करनी पड़ रही है। ऐसे में वर्ष 2015 से 2018 तक बात की जाए तो प्रतिवर्ष अधिकतम केवल 30 लोग जांच करवाने के लिए नमूने लेकर पहुंचे हैं। कई लोगों को न तो इस नियम की जानकारी है और ना ही किसी को यह पता है कि ये जांच लैब है कहां?
ये है नियम
कोई भी व्यक्ति अपने स्तर पर किसी भी खाद्य सामग्री की एक हजार रुपए देकर जांच करवा सकता है। यदि कोई व्यक्ति कहीं से कोई भोजन, मिठाई, नमकीन या अन्य कोई भी सामग्री खरीदता है और वह इससे संतुष्ट नहीं है तो वह तत्काल उसे लैब में जमा करवाकर जांच की अर्जी दे सकता है। एक पखवाड़े में लैब उसकी शुद्धता जांचकर उसे रिपोर्ट देगी।
ये भी हो सकता है
मिलावट या अमानक होने के अंदेशे पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में भी नमूना दिया जा सकता है। इसकी जांच का खर्च सरकार वहन करेगी।
पुलिस को भी सीधे तौर पर शिकायत की जा सकती है, जिसकी जांच भी सीएमएचओ के माध्यम से होगी।
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2011 के बाद से बढ़ गई राशि
वर्ष 2011 के बाद से यह राशि बढ़ाई गई है, पहले दस से बीस रुपए में अलग-अलग जांच हो जाती थी, लेकिन अब इसकी राशि एक हजार हो चुकी हैं। हालांकि लोग सीएमएचओ के माध्यम से लैब में नमूने पहुंचा सकते हैं, इससे उनकी राशि खर्च नही होगी।
पंकज मिड्डा, मुख्य खाद्य एनालिस्ट, खाद्य सुरक्षा लेबोरेट्री उदयपुर





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