अमरगढ़।
मासूम बादल को खांसी-जुकाम की शिकायत पर परिजन अस्पताल नहीं ले गए बल्कि 11 नवम्बर को घर पर नाना ने गर्म तार से डाम लगाया। बच्चा चीखता रहा। परिजनों ने उसके हाथ-पैर कसकर पकड़ लिए और नाना दागता रहा। इससे मासूम की हालत और बिगड़ गई। परिजन फिर उसे नीम हकीम के पास ले गए, कथित इलाज चला।
शनिवार सुबह हालत ज्यादा बिगड़ी तो काछोला अस्पताल ले गए। फिर एमजीएच भर्ती कराया तब बच्चे को सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी। डॉक्टरों के लाख जतन के बावजूद बालक को नहीं बचाया जा सका। पहले भी लगा चुका डाम घटना के बाद जहाजपुर ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी अमित गुप्ता, खजूरी डॉक्टर राजेंद्र कुमार सोमाणी व अमरगढ़ चौकी प्रभारी सियाराम मीणा मौके पर पहुंचे। पूछताछ में नाना नंदलाल ने माना कि इससे पहले भी वह कई बच्चों को गर्म तार से डाम लगा चुका है। उसने बताया कि निमोनिया की शिकायत पर लोग बच्चे उसके पास लाते थे। बार-बार बदला नानी ने बयान बालक को एमजीएच लेकर आए तो उसकी मां व नानी साथ थी। पुलिस के डर से नानी ने बयान दिया कि बालक को उसके गांव रूपपुरा में ही डाम लगाया गया लेकिन जांच की तो सच्चाई सामने आई। बार-बार बयान बदलने से पुलिस और बाल कल्याण समिति अध्यक्ष भी पसोपेश में रही। दो माह में चौथी घटना डाम लगाने की दो माह में चौथी घटना है। १९ सितम्बर को बिजौलियां के चिताबड़ा के गिरधारी कंजर की ४५ दिन की बेटी आंचल के गर्म चिमटे से पेट पर डाम लगाया था। पुलिस ने गांव के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।
21 सितम्बर को कोदूकोटा के जगदीश मीणा की तीन माह की पुत्री गुंजन को निमोनिया की शिकायत पर मां ने गर्म ब्लेड से दागा था। मां के खिलाफ सदर थाने में मामला दर्ज है। 21 अक्टूबर को चित्तौडग़ढ़ के खुरपापुर निवासी रंगलाल भील के एक साल के पुत्र राकेश को जुकाम-खांसी होने पर गर्म चिमटे से पेट पर डाम लगाया। पांच की जा चुकी जान बीते दो साल में जिले में एक दर्जन से अधिक मासूमों को डाम लगाया गया। इनमें पांच बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें तीन बालक व दो बालिकाएं थी। परिजनों के खिलाफ मामला भी थाने पर दर्ज कराया गया। कई मामलों में गिरफ्तारी भी हुई है। ग्रामीण सर्दी-जकुाम होने पर बच्चों को चिकित्सक को नहीं दिखाते। बल्कि डाम लगाते हैं। लापरवाही पर पर नोटिस घटना को गम्भीरता लेते हुए ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी गुप्ता ने डॉ व भगुनगर एएनएम व आशासहयोगिनी की लापरवाही मानते हुए नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने सबको नोटिस जारी किया है। कागजों में सिमटी समझाइश पुलिस व चिकित्सा विभाग के रिकॉर्ड बताते है कि जिले में इलाज के नाम पर डाम की घटनाएं कड़े कानून नहीं होने से थम नहीं सकी है। हालांकि सरकारी दावे है कि विभिन्न संगठनों, साक्षरता समिति, आगंनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि बीमारी का इलाज चिकित्सा विभाग के पास है ना ही कथित भोपों, तांत्रिकों व बाबाओं के पास, लेकिन ये सरकारी समझाइस कागजों में ही सिमट कर रह गई है।





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