राजसमंद. रोशनी का पर्व दीपोत्सव सोमवार से श्रद्धा, परंपरा एवं हर्षोल्लास के साथ शुरू हो गया। अल सुबह घर- प्रतिष्ठान की चौखट पीली मिट्टी से लीपकर विशेष पूजा अर्चना की गई। शाम को दिन ढलने पर चौतरफा घर, प्रतिष्ठान, गांव व शहर दीपों से जगमगा उठेगा। धनतेरस पर बर्तन, ज्वैलरी, कार खरीदने के लिए अग्रिम बुकिंग करवा ली है, जिसको लेकर बाजार में भी खासी रौनक है। शुभ मुहूर्त में महालक्ष्मी, भगवान धनवन्तरी एवं कुबेर की विशेष पूजा कर विभिन्न मिठाइयों के भोग धराए जाएंगे। जिला मुख्यालय पर धनतेरस के एक दिन पहले ही बाजार में खरीददारी को लेकर लोगों की काफी चहल पहल बनी रही। महालक्ष्मी, धनवन्तरी व कुबेर की पूजा के लिए फूल माला, अर्क, पूजन सामग्री अग्रिम खरीद के लिए लोगों में उत्सुकता दिखी। घर, प्रतिष्ठान में रंग रोगन, सफाई का कार्य भी पूर्ण कर लिया गया। आयुर्वेद प्रणेता भगवान धनवन्तरी की आयुर्वेद महकमे के अधिकारी व कार्मिकों द्वारा भी विशेष पूजा अर्चना की जाएगी।
रूप चतुर्दशी का पर्व कल
6 नवंबर को रूप चतुर्दशी का पर्व भी श्रद्धा से मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं दुल्हन की तरह सज संवर कर महालक्ष्मी की पूजा अर्चना करेगी। ज्योतिष के मुताबिक सुबह रूप चौस का अरुणोदय स्नान सुबह 6 .50 बजे तक और सायं पूजा, यम दीपनम् अपराह्न 3.01 से 4.23 बजे तथा प्रदोष वेला 5.54 से 8 .18 बजे तक में रूप चतुर्दशी व नरक चतुर्दशी के निमित दीपदान करना फलदायी है।
बहीखातों की बिक्री
मार्बल खदान, फैक्ट्री, कटर, गोदाम, दुकान, दफ्तर व अन्य तमाम प्रतिष्ठान के व्यापारियों ने बहीखातों की खरीद कर ली। इसके लिए स्टेशनरी की दुकानों पर व्यापारियों की काफी चहलकदमी रही।
डेकोरेशन से सजने लगे मंदिर
नाथद्वारा के श्रीनाथजी व कांकरोली में द्वारकाधीश मंदिर में लाइट डेकोरेशन से सजा दिए गए हैं। मंदिरों में परंपरानुसार विशेष प्रसाद बनाने, गोवर्धन पूजा व अन्नकूट महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में है। इसी तरह गढबोर में चारभुजानाथ व सैवंत्री में भगवान रूपनारायण मंदिर में भी परंपरानुसार धनतेरस, दीपावली व गोवर्धन पूजा पर्व मनाया जाएगा।
धनतेरस के ये शुभ मुहूर्त
पंडित भरत खंडेलवाल ने बताया कि धनतेरस पर पूजा व खरीददारी का अबूझ मुहूर्त है, जिसके तहत दिनभर कुबेर पूजा, भगवान धनवन्तरी की पूजा व यम दीपदान किया जा सकेगा। खरीद मुहूर्त सोमवार सुबह 6 .50 से 8 .11 बजे, 9.33 से 10.55 से 12.39 बजे, शाम 1.40 से 5.55 बजे तक एवं प्रदोष वेला शाम 5.55 से 8 .19 बजे तक है।





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