राजेन्द्रसिंह देणोक
पाली। प्रदेश की हाइप्रोफाइल विधानसभा सीट बाली 20 साल बाद फिर चर्चा में है। 1993 और 1998 में भैरोंसिंह शेखावत के चुनाव लडऩे से सुर्खियों में आई बाली सीट इस बार गठबंधन की राजनीति को लेकर चर्चा में है।
यहां कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के समीकरण बन रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति की दिल्ली में हुई बैठक में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन पर काफी गहनता से विचार किया गया।
यदि इसे मूर्त रूप दिया गया तो बाली में पहली बार कांग्रेस का उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरेगा। कांग्रेस यहां एनसीपी का सहयोग करेगी। कांग्रेस का यह प्रयोग कितना कारगर साबित होगा यह तो समय तय करेगा, लेकिन बाली सीट पर इस बार नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। तीन लाख से ज्यादा मतदाताओं वाले विधानसभा क्षेत्र बाली में पिछले छह चुनावों से भाजपा लगातार जीत रही है। भाजपा के कद्दावर नेता रहे भैरोंसिंह शेखावत की जीत से शुरू हुआ भाजपा का सफर अब तक जारी है। वर्तमान विधायक पुष्पेन्द्रसिंह राणावत लगाचार चार बार से अपनी सीट बचाए हुए हैं। हालांकि, शुरुआती दौर में कांग्रेस भी पांच बार काबिज रही, लेकिन 1985 के बाद उसे दोबारा लौटने का मौका नहीं मिल पाया। बाली के मतदाताओं ने स्वतंत्र पार्टी, जेएनपी और निर्दलीय उम्मीदवार को भी एक-एक बार अवसर दिया है।
अरमान अधूरे रहेंगेे या या होंगे पूरे?
कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन पर मोहर लगी तो बाली सीट से दावेदारी कर रहे कांग्रेस नेताओं के अरमान अधूरे रहेंगे या किसी नेता को अन्य जगह शिफ्ट किया जाएगा, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है। क्योंकि कांग्रेस के कई नेता लम्बे समय से क्षेत्र में सक्रिय है और उनका राजनीतिक भविष्य भी दावं पर लगेगा। ऐसे में स्थानीय दावेदारों को खुश रखना भी कांग्रेस के लिए चुनौती होगा। दूसरी, तरफ एनसीपी अपना उम्मीदवार पहले से ही तय कर चुकी है। दो दशक पूर्व 1998 में भैरोंसिंह शेखावत के सामने कांग्रेस से ताल ठोकने वाले उम्मेदसिंह चांपावत एनसीपी के उम्मीदवार है। शेखावत के सामने मैदान में उतरे चंपावत 20 साल बाद फिर इसी सीट पर चुनावी रण में कूदे हैं।
अब भी असमंजस में कार्यकर्ता
बाली सीट पर कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की चर्चाओं का दौर कई दिनों से चल रहा है। एनसीपी काफी पहले अपना दावा कर चुकी है। हालांकि, पूर्व में कांग्रेस की तरफ से कोई संकेत नहीं मिले थे। लेकिन अब प्रदेशभर में हलचल मची हुई है। हालांकि, अब भी स्थिति साफ नहीं है। इस कारण बाली क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ता असमंजस में है।
बाली सीट का इतिहास
वर्ष विजेता, पार्टी
2013 - पुष्पेन्द्रसिंह, भाजपा
2008 - पुष्पेन्द्रसिंह, भाजपा
2003 - पुष्पेन्द्रसिंह, भाजपा
2002 - पुष्पेन्द्रसिंह, भाजपा
1998 - भैरोंसिंह शेखावत, भाजपा
1993 - भैरोंसिंह शेखावत, भाजपा
1990 - अमृतलाल, निर्दलीय
1985 - रघुनाथ, कांग्रेस
1980 - असलम खान, कांग्रेस
1977 - हनवंतसिंह, जेएनपी
1972 मोहनराज, कांग्रेस
1967 पृथ्वीसिंह, एसडब्लयूए
1962 मोहनराज, कांग्रेस
1957 देवा, कांग्रेस
1951 लक्ष्मणसिंह, निर्दलीय





No comments:
Post a Comment