जैसलमेर. करीब 28 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र इतना अधिक विस्तृत है कि, इसका चप्पा-चप्पा छानना किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए आसान नहीं। दूर-दराज के गांव-ढाणियों में छितरी हुई आबादी आजादी के इतने सालों बाद भी कई बुनियादी सुविधाओं से महरुम है। पत्रिका टीम ने चुनावी हार-जीत की कुंजी अपने पास रखने वाले जैसलमेर शहरी क्षेत्र का व्यापक दौरा कर जमीनी हालात जाने तो तस्वीर नजर आई कितने ही वर्षों से बनी जनसमस्याएं अब तक कायम ही नजर आई। गीता आश्रम मार्ग से गीता आश्रम चौराहा और वहां से हनुमान चौराहा जाने वाले मार्ग पर रोजाना की भांति नालियों व नालों का गंदला पानी ओवरफ्लो होकर बह रहा था। उसके चंद कदम आगे शहर के सबसे व्यस्त हनुमान चौराहा पर यातायात व्यवस्था चरमराई हुई थी। सुबह साढ़े दस बजे का समय था। स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में आए देशी सैलानियों के वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही को संभालने के लिए एक भी यातायात या पुलिसकर्मी नहीं था।
थोड़ा है, ज्यादा की जरूरत है...
पत्रिका टीम यहां से जैसलमेर में राजकीय जवाहर चिकित्सालय एकमात्र अस्पताल पहुंची तो पाय कि गत सालों के दौरान यहां कई भौतिक और व्यवस्थागत सुधार देखने में आए हैं। कई सालों से बनकर तैयार होने के बावजूद ताले में कैद ट्रोमा सेंटर गत आठ माह से शुरू होने से हादसों में घायल लोगों को बड़ी राहत मिली है। किडनी रोगों से ग्रस्त लोगों के लिए यहां डायलिसिस जैसी महंगी सेवा बहुत वाजिब तथा भामाशाह कार्डधारी, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकदम नि:शुल्क उपलब्ध होना बड़ी उपलब्धि है। अस्पताल में कुल 52 चिकित्सकों के सृजित पदों के विरुद्ध वर्तमान में 33 कार्यरत हैं, अस्पताल में करीब 500 तरह की दवाइयां भी नि:शुल्क मिल रही है। यहां 8 फार्मासिस्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं हालांकि इनकी संख्या 16 होनी चाहिए।
अव्यवस्थाओं का ‘ठहराव’
जवाहर चिकित्सालय से आगे बढ़ते हुए पत्रिका टीम नगरपरिषद की ओर से बनवाए गए बस अड्डे पहुंची। यहां से रोजाना करीब 27 बसें जोधपुर, बीकानेर, अहमदाबाद, बाड़मेर, जयपुर, अजमेर, फालना, माउंट आबू आदि के लिए संचालित होती हैं, लेकिन रोडवेज ने बिजली का कनेक्शन तक नहीं लिया हुआ है, जिससे टिकटों का आरक्षण नहीं हो पाता। टिकट काटने वाले कार्मिक को लाइट के अभाव में कम्प्यूटर तो दूर भीषण गर्मी में बिना पंखे के काम करना पड़ता है। यहां पुराने शौचालय के पास जमा गंदगी स्वच्छता अभियान का मुंह चिढ़ा रहा था। नगरपरिषद की ओर से नए बनाए गए सुविधा केंद्र में अवश्य शुल्क चुकाकर नहाने-धोने की सुविधा मिल रही है। बस अड्डे में अपराह्न 4 बजे के बाद कोई बस नहीं है। लिहाजा बड़ी संख्या में अवैध पार्किंग की जाती है। बस स्टैण्ड की चारदीवारी कई जगहों से जर्जर हो चुकी है। शाम अथवा रात के समय यहां से कोई बस न जाती है और न आती है।
नहीं हुआ कच्ची बस्तियों का पक्का समाधान
जैसलमेर में एक दर्जन वैध-अवैध कच्ची बस्तियां कायम हो चुकी हैं। यहां हजारों की तादाद में अवैध कब्जे हो रखे हैं और कई दबंग लोगों ने तो कब्जों को व्यापार बना दिया है। गफूर भट्टा कच्ची बस्ती में तो लोगों ने आम रास्तों तक को नहीं छोड़ा। यही स्थितियां कमोबेश अन्य कच्ची बस्तियों की है। राजनीतिक दखल के चलते और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के अभाव के कारण कच्ची बस्तियों के विस्तार और कब्जों पर कब्जों की समस्या लगातार विकट होती दिखाई दी। पर्यटन पर आधारित जैसलमेर में सरकार और प्रशासन की ओर से पर्यटकों की सुविधा को बहुत कम ध्यान में रखा जा रहा है। पत्रिका टीम ने गुजराती सैलानियों के सैलाब के बीच पटवा हवेली, सोनार दुर्ग, गड़ीसर और मुख्य बाजारों में पहुंची तो यहां भी व्यवस्थाओं का टोटा नजर आया।
विधायक निधि में खर्च :
वर्ष 2014-15 - 57.00 लाख
वर्ष 2015-16 - 211.76 लाख
वर्ष 2016-17 - 329.41 लाख
वर्ष 2017-18 - 248.51 लाख
वर्ष 2018-19 - 294.23 लाख
योग - 1140 लाख यानि 11.40 करोड़
2013 चुनाव परिणाम
छोटूसिंह भाटी (भाजपा) -78 790 (49.42 प्रतिशत)
रूपाराम मेघवाल (कांग्रेस) -75923 (47.6 2 प्रतिशत)
छोटूसिंह भाटी 28 6 7 मतों से विजयी रहे थे।





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