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जैसलमेर के इस क्षेत्र में गिद्धों की बढ़ रही संख्या, वन विभाग ने किए सुरक्षा के ऐसे प्रबंध

पोकरण. वन विभाग की ओर से क्षेत्र के लाठी, धोलिया, खेतोलाई, ओढ़ाणिया, भादरिया सहित आसपास क्षेत्र में बढ़ रही दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों की संख्या को देखते हुए उनकी सुरक्षा को लेकर कवायद शुरू कर दी गई है। इसी के अंतर्गत गिद्ध बाहुल्य क्षेत्रों में वन विभाग की ओर से गश्त बढ़ा दी गई है तथा सडक़ों पर वाहनों की चपेट में आने और रेल पटरियों पर रेल की चपेट में आने से बचाने के लिए वन विभाग की ओर से यहां अपने कार्मिक तैनात कर प्रतिदिन गश्त करने के लिए पाबंद किया गया है, ताकि यहां किसी दुर्घटना में गिद्धों की मौत नहीं हो। इसी प्रकार भादरिया, लाठी, धोलिया व खेतोलाई ओरण में भी गिद्धों की निगरानी के लिए अलग से कर्मचारी तैनात किए गए है।
क्यों काल का ग्रास बन रहे गिद्ध
क्षेत्र के भादरिया, लाठी, धोलिया, खेतोलाई, ओढ़ाणिया, चांधन आदि गांव पशु बाहुल्य है। यहां प्रतिदिन दर्जनों पशुओं की मौत होती है। गिद्धों का भोजन भी बड़े मृत पशु है। यहां सडक़ों व रेल पटरियों के किनारे कई बार पशुओं के शव पड़े रहते है। जिन्हें खाने के लिए गिद्ध उन पर मंडराते है। इसी दौरान रेल अथवा किसी वाहन की आवाज सुनकर जैसे ही गिद्ध उडऩे का प्रयास करते है, तो रेल व वाहन की चपेट में आने से उनकी मौत हो जाती है। रेल व वाहन से टकराकर गिद्धों की मौत को रोकने के लिए वन विभाग की ओर से पटरियों व सडक़ों के किनारे गश्त कर मृत पशु के शव को तत्काल हटाकर दूर जंगल में डालने के पुख्ता प्रबंध किए गए है।
10 दिन में हटाए 79 मृत पशुओं के शव
वन विभाग के सहायक वनसंरक्षक बृजमोहन गुप्ता ने बताया कि भादरिया गांव में विशाल गौशाला है। यहां प्रतिदिन बीमार व वृद्ध पशुओं की मौत होती है। इसी प्रकार आसपास क्षेत्र के गांव भी पशु बाहुल्य है। यहां के पशु जंगल में इधर उधर चरने के लिए जाते है। इस दौरान सडक़ पर किसी वाहन की चपेट में आने अथवा रेलवे ट्रेक पर रेल से कट जाने से उनकी मौत हो जाती है। उन पशुओं के शव समय पर नहीं उठाए जाने के कारण गिद्ध उन पर मंडराते है तथा वाहनों की चपेट में आ जाने से उनकी मौत हो जाती है। इसी को लेकर उपवनसंरक्षक आशुतोष ओझा के निर्देशानुसार रेल पटरियों व सडक़ों के किनारे पड़े पशुओं के शवों को हटाने के लिए अभियान शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि गत 10 दिनों में रेलवे ट्रेक लाठी-ओढ़ाणिया के पास 79 मृत पशुओं के शवों को रेलवे ट्रेक से दूर ले जाकर जंगल में डाला गया। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय वन अधिकारी लाठी धीराराम, सहायक वनपाल कानसिंह, तगसिंह, सुखराम के साथ गुरुवार को उन्होंने ओढ़ाणिया से लाठी तक रेल ट्रेक का निरीक्षण किया तथा कार्मिकों को प्रतिदिन गश्त कर सडक़ों व रेल पटरियों के किनारे पशुओं के शवों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए, ताकि दुर्घटना से गिद्धों को बचाया जा सके।



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