कुंभलगढ़. आमेट-कुंभलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के उपखण्ड मुख्यालय एवं चारभुजा की प्यास बुझाने के लिए बनी बेड़च का नाका परियोजना पिछले डेढ़ दशक से अटक रही है। वादे तो सभी ने किए, लेकिन इसका काम आज तक शुरू नहीं हो पाया है।
जोंक का नाका परियोजना को लेकर भाजपा व कांग्रेस दोनों ही पार्टियां हर चुनावों में वादे करती रही, लेकिन काम नहीं हुआ। वहीं, कांग्रेस के शासनकाल में तो करोड़ों रुपए की वृहद पेयजल योजना को केचमेंट एरिया नहीं होने की बात कहते हुए एनिकट में बदल डाली। इसके बाद गत 2013 में चुनावों से ठीक पहले आनन-फानन में डेढ़ करोड़ की लागत से एनिकट का कार्य शुरू करवा दिया। मौके पर कार्य इतना घटिया हुआ कि एनिकट में एक बूंद भी पानी नहीं टिकता। इसी तरह केलवाड़ा से चारभुजा मार्ग पर उपखण्ड मुख्यालय से मात्र तीन किलोमीटर दूर जोगेला नाम की नाड़ी को भू-दलालों ने अवैध रूप से मिट्टी से पाटकर प्लॉट काटकर बेचने की तैयारी कर डाली थी। पांच वर्ष पूर्व वर्तमान विधायक राठौड़ ने नामांकन के दिन मुख्य चुनावी मुद्दा बनाते हुए चुनाव जीतते ही नाड़ी से मिट्टी खाली करवा उन लोगों के घर या होटल के सामने खाली कराने का वादा किया था, जिन पर आरोप था की उनकी सह पर नाड़ी को पाटा गया है। लेकिन, आज दिन तक नाड़ी से मिट्टी नहीं निकाली गई। यहां की खस्ताहाल सडक़ें भी क्षेत्र के बड़े मुद्दों में शामिल है, जो स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी सिरदर्द बनी हुई है। साथ ही पर्यटन व्यवसाय भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उपखण्ड मुख्यालय सहित आसपास का पूरा इलाका गांवों में समुचित साफ-सफाई, पेयजल, सुगम सडक़ों के अभाव एवं अतिक्रमण से त्रस्त है।
लोगों के बीच रहे
विधायक सुरेन्द्रसिंह राठौड़ पांच साल तक सक्रिय रहे। लेकिन, आम लोगों को छोटी-छोटी शिकायतों से पूरी तरह निजात दिलाने में विफल रहे। वहीं किसी का भी फोन नहीं उठाने की शिकायत पूरे पांच वर्ष रही। हालांकी अभी-अभी छह माह से पूर्ण रूप से सक्रिय रहे। उधर, कांग्रेस के गणेशङ्क्षसह परमार पूरे पांच वर्ष जनता के बीच सक्रिय रहे। फोन भी उठाते और छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर भी सक्रिय नजर आए।
क्या थे वादे
1. जीतते ही क्षेत्र में कॉलेज खुलवाना, जो की पूर्ण हुआ
2. जोगेला नाड़ी में अवैध रूप से भरी मिट्टी को खाली करवाना, जो नहीं हो सका
3. बेड़च का नाका पेयजल परियोजना को पूर्ण कराना, जो कि प्रारंभ भी नहीं हो पाई
4. सुगम सडक़े एवं यातायात व्यवस्था में सुधार, नहीं हो पाया
5. तमाम स्कूलेें माध्यमिक स्तर की बनवाना, अधिकतर हो गई
गणेशङ्क्षसह परमार
1. जोंक का नाका को एनिकट में बदलवा दिया, लेकिन वो किसी काम का नहीं
2. पर्यटन विकास को लेकर कार्य करना था, नहीं हो पाया
3. केलवाड़ा चिकित्सालय में महिला चिकित्सक की तैनातगी कराना, जो हुआ, लेकिन चिकित्सक के नियमित रूप से नहीं आने की शिकायत है
4. सडक़ों को लेकर शिकायतें, दूर नहीं हो पाई
क्षेत्र का जन ऐजेडा
1. पर्यटन की दृष्टि से उदयपुर से कुंभलगढ़, सायरा से कुंभलगढ़ एवं नाथद्वारा से कुंभलगढ़ की सडक़ चौड़ी होकर सुगम बने।
2. क्षेत्र के युवाओं के अन्य राज्यों में पलायन को रोकने के लिए स्थायी रोजगार की स्थापना की जाए।
3. कुंभलगढ़ से जयपुर, उदयपुर, श्रीनाथद्वारा, फालना एवं गोगुन्दा मार्ग पर रोडवेज बसों का नियमित संचालन किया जाए।
4. सरकारी विद्यालयों में रचनात्मक सुधार हो तथा आधुनिक सविधाओं का विस्तार हो युवाओं को उच्च शिक्षा मिले।
5. उपखण्ड मुख्यालय सहित आसपास के गांवों में समुचित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए।
6. क्षेत्र संचार की दृष्टि से बेहद पिछड़ा हुआ है, अत: जिला प्रशासन इसमें दखल कर निजी मोबाइल आपरेटरों को दुरस्त एवं मजबूत संचार व्यवस्था देने के लिए पाबंद करे।
7. उपखण्ड मुख्यालय के अलावा पर्यटन क्षेत्र होने के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर स्तरीय चिकित्सा सुविधा हो।
8.क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर केलवाड़ा थाने में नफरी हो, परशुराम महादेव एवं कुंभलगढ़ द़ुर्ग पर स्थायी पुलिस चौकी की स्थापना हो।
9. क्षेत्र प्राकृतिक पैदावार के लिए अनुकूल एवं प्रसिद्ध है। इसके लिए प्राकृतिक पैदावार का संरक्षण एवं किसानों को पानी-बिजली मिले।
10. मुख्य रूप से क्षेत्र के जोंक का नाका एवं बेड़च का नाका का निर्माण शीघ्र्र हो, जिससे पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
2013 में हार-जीत का अंतर
कुल वोटर 204242 थे, पुरुष 105336 एवं महिला 98906
नतीजे
वोट पड़े127806
सुरेन्द्रसिंह को मिले-73402 (57.43 प्रतिशत)
गणेशसिंह को मिले-45796 (35.83 प्रतिशत)
हार-जीत का अंतर- 27606 वोटों से राठौड़ जीते।
बसपा के धीरज गुर्जर को मिले (5.74 प्रतिशत)
निर्दलिय भंवरलाल माली को मिले(1.0 प्रतिशत)
विधायक निधि में खर्च
2013-14--2 खर्च 2
2014-15--2 खर्च 2
2015-16--2.25 खर्च 2.25
2016-17--2.25 खर्च 2.25
2017-18--2.25 खर्च 2.25
पर्यटन विकास की विपुल संभावना
कुंभलगढ़ दुर्ग विश्व विरासत में शामिल होकर राजस्थान का टॉप का पर्यटन डेस्टिनेशन है। ऐसे में यहां पर्यटन व्यवसाय की विपुल संभावना है। यहां पहुंचने के लिए सडक़ो की दशा बहुत खराब है। इससे पर्यटन व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। क्षेत्र की विकास की धुरी सडक़ें है, सबसे पहले इस पर ध्यान देना चाहिए।
जमना शंकर आमेटा, अध्यक्ष होटल एसोसिएशन
पेयजल समस्या व यातायात में सुधार हो
क्षेत्र में स्थाई पेयजल व्यवस्था नहीं है। वहीं, उपखण्ड मुख्यालय एवं पर्यटन डेस्टिनेशन होने के बावजूद यहां यातायात के साधन नहीं के बराबर हैं। ऐसे में यहां स्थायी पेयजल योजना व सुगम यातायात व्यवस्था के अलावा चिकित्सालय में महिला विशेषज्ञ की स्थायी नियुक्ति होनी चाहिए। वहीं, कॉलेज एवं स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए
खुशाल शर्मा, कॉलेज छात्र





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