अलवर. हमारा शहर बहुत ही सुंदर था, बहुत ही शांति था यहां का माहौल लेकिन अब सारे हालात बदल गए हैं। पिछले कई सालों में हमारा शहर बहुत पिछड़ गया है। सारा विकास नीमराणा व भिवाड़ी की तरफ हो रहा है , हमारा शहर तो हर तरह से पिछड़ रहा है। यह पीड़ा थी शहर की महिलाओं की। राजस्थान पत्रिका की टीम ने जब महिलाओं से बातचीत की तो उनकी पीड़ा सामने आई। पत्रिका की ओर से आयोजित कार्यक्रम टॉक शो में महिलाओं ने अपनी प्रतिक्रिया इस प्रकार व्यक्त की।
&कॉलोनी की लाइटें दिन में जलती है और रात को यहां अंधेरा रहता है। सडक़ों पर टे्रफिक जाम रहता है। सारे दिन धूल मिटटी उड़ती है। जगह जगह पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। अब तो विधायक व पार्षदों से भरेासा ही उठ गया है। कोई महिला जनप्रतिनिधि आए तो ही फायदा हो सकता है।
सरोज
&पांच सालों में हमारा शहर बहुत पिछड़ गया है। छोटे -छोटे शहरों में एयरपोर्ट बन गए हैं, लेकिन हमारे यहां कुछ नहीं है। दिल्ली जाने के लिए सुबह के बाद कोई ट्रेन नहीं है। बस से जाने पर समय लगता है। अकेली महिला कार से भी नहीं जा सकती। कौन सुनेगा इन परेशानियों को।
रेखा अग्रवाल
पहले कॉलोनियों में पुलिस की गश्त होती थी, लेकिन अब तो पुलिस वाले नजर ही नहीं आते। महिलाएं शाम छह बजे बाद घर से नहीं निकल सकती कभी भी पर्स छिन जाता है , चैन स्केचिंग हो जाती है। हम सुरक्षित नही है।
रजनी महावर
&रात को सडक़ों पर अंधेरा रहता है, पंाच साल में कभी स्ट्रीट लाइट नही जली। नालियां कचरे से भरी हुई है। सफाई कर्मियों की भर्ती के बाद भी शहर गंदा है। मच्छर कभी खत्म नहीं होते। यहां आकर कोई भी बीमार हो सकता है। हमें स्वच्छ व सुंदर अलवर चाहिए।
इंदू शर्मा





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